इसके अलावा उन्होंने हॉस्टल में दो बेड के बीच में अस्थाई पार्टीशन के निर्देश को भी गलत बताया। उन्होंने कहा कि स्कूल दो बेड के बीच में पर्याप्त दूरी रख रहे हैं। केवल उन्हीं छात्रों व स्टाफ को एंट्री दी जाएगी, जिनकी रिपोर्ट नेगेटिव होगी। ऐसे में पार्टीशन करने से बच्चा खुद को अकेला और तनाव में महसूस करेगा।
उन्होंने आवासीय स्कूलों में सभी स्टाफ के लिए आवासीय व्यवस्था करने के फैसले को भी गलत बताया। उन्होंने कहा कि प्रत्येक स्टाफ का अपना परिवार और निजी जीवन भी है। बैठक में पीपीएसए अध्यक्ष प्रेम कश्यप, दून इंटरनेशनल स्कूल के चेयरमैन डीएस मान, अमरजीत सिंह जुनेजा, रमेश बता, सोमदत त्यागी समेत अन्य मौजूद रहे।
पीपीएसए के अध्यक्ष प्रेम कश्यप ने कहा कि उत्तराखंड सरकार को हरियाणा से सीखना चाहिए। हरियाणा में भी दो नवंबर से स्कूल खुल रहे हैं। वहां की सरकार ने स्कूलों को अपने स्तर पर एसओपी बनाने के निर्देश दिए हैं। सोशल डिस्टेंसिंग, मास्क, सैनिटाइजर व अन्य सुरक्षा उपाय वहां भी स्कूलों को करने हैं।
लेकिन वहां किसी को जेल भेजने के लिए धमकाया नहीं जा रहा। उत्तराखंड सरकार की एसओपी में साफ कहा गया है कि अगर संक्रमण हुआ तो स्कूल प्रबंधन के खिलाफ मुकदमा होगा। इसे तैयार करने से पहले स्कूल संचालकों और शिक्षाविदों की विश्वास में लिया जाना चाहिए था।