मूलत: पौड़ी के पोस्ट धूमाकोट ग्राम नाला निवासी वीरेंद्र सिंह भारतीय सेना में हवलदार रहे हैं। वर्ष 2014 में वह 19 गार्ड रेजीमेंट, गुरदासपुर से सेवानिवृत्त हुए थे। इसके बाद उन्होंने बांबे इंटेलीजेंट सिक्योरिटी कंपनी में नौकरी शुरू कर दी थी। वीरेंद्र पिछले तीन वर्ष से सेंट्रल बैंक में नौकरी कर रहे थे। वह 12 साल पहले जुड़का नंबर दो में आकर बसे थे। गांव में ही उन्होंने एक एकड़ कृषि भूमि भी खरीदी थी।
समय पर खून मिलता तो बच सकती थी जान
सरकारी अस्पताल के डॉक्टर राजीव चौहान ने बताया कि जांघ में गोली लगने से वीरेंद्र के घुटने के पीछे की धमनी फट गई थी। इस कारण तेजी से रक्तस्राव हो रहा था। रक्तस्राव अधिक होने से मरीज को खून की जरूरत थी लेकिन सिर्फ एक यूनिट ब्लड का ही इंतजाम हो पाया। अस्पताल में डॉक्टर इलाज कर रहे थे कि मरीज के तीमारदार उसे बिना डिस्चार्ज कराए ही ले गए। संभवत: खून की कमी के चलते वीरेंद्र की मौत हुई है।
पुलिस ने बाइक को किया सीज
बैंक के सुरक्षा गार्ड से टकराने वाले बाइक सवार रामनगर निवासी बताए गए हैं। दोनों ईद मिलादुन्नबी पर मस्जिद सजाने के लिए बिजली झालरें लेने के लिए काशीपुर आए थे। बाइक रोकने के लिए उन्होंने ब्रेक लगाए लेकिन बाइक असंतुलित होकर गार्ड से टकरा गई और हादसा हो गया। हादसे के बाद पकड़े जाने के डर से बाइक सवारों ने दौड़ लगा दी लेकिन चीमा चौराहे पर तैनात पुलिसकर्मियों ने उन्हें पकड़ लिया। कोतवाल चंद्रमोहन ने बताया कि सुरक्षा की दृष्टि से पुलिस ने उनकी बाइक कब्जे में ले ली है। बैंक के शाखा प्रबंधक वीके सोनी की ओर से देर रात पुलिस को तहरीर सौंपी गई है।