योगगुरु महर्षि महेश योगी ने पार्क क्षेत्र में योग, ध्यान के लिए वर्ष 1957 में यहां आश्रम का निर्माण किया था। वन विभाग से लीज में भूमि लेने के बाद योगगुरु ने यहां भावतीत और योगध्यान के लिए योग नगरी का निर्माण किया।
लगभग वर्ष 1984 में योगगुरु यह आश्रम छोड़कर नीदरलैंड चले गए। पार्क प्रशासन ने फिर इस पर अपना स्वामित्व जमा दिया। कोरोनाकाल के कारण मार्च से यह कुटिया बंद थी।
चौरासी कुटिया में प्रवेश के लिए पार्क प्रशासन ने पर्यटकों के लिए शुल्क निर्धारित किया है। यहां विदेशी पर्यटकों के लिए छह सौ और देशी पर्यटकों के लिए तीन सौ रुपये शुल्क है। इसके अलावा छात्र-छात्राओं के लिए दो सौ रुपये शुल्क निर्धारित किया हुआ है।