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निठारी कांडः ये है मोनिंदर सिंह पंधेर को सलाखों के पीछे पहुंचाने वाला सख्श, पढ़ें दर्दनाक कहानी

Thu, 27 Jul 2017 09:00 AM IST
भास्कर पोखरियाल-मोहम्मद शमी/ अमर उजाला, गदरपुर
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nithari case - फोटो : अमर उजाला
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नोएडा के निठारी कांड ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया था। वर्ष 2006 में हुए इस जघन्य कांड के खुलासे का मुख्य सूत्रधार एक ऐसी बेटी का पिता है जो सफलता की ऊंचाइयां छूना चाहती थी, लेकिन वहशी पंधेर ने उसे ऐसा नहीं करने दिया।
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उत्तराखंड के ऊधमसिंह नगर जिले के गदरपुर तहसील के गांव पिपलिया निवासी नंदलाल ही थे, जिन्होंने अपनी बेटी की हत्या के खुलासे के लिए कानून की हर दहलीज पर फरियाद लगाई।

इलाहाबाद हाईकोर्ट से लेकर राष्ट्रपति दरबार तक संघर्ष किया और आखिर उनकी न्याय की यह लड़ाई सफल हुई। देश के सामने दो नर पिशाचों का चेहरा सामने आया।

पंधेर को फांसी की सजा सुनकर मिला सुकून

Moninder singh pandher
जब उन्हें यह सूचना मिली कि निठारी कांड के मुख्य आरोपी मोनिंदर सिह पंधेर को भी फांसी की सजा सुना दी गई है तो उन्होंने सुकून महसूस किया और परिवार के हर सदस्य के साथ-साथ पूरे पिपलिया गांव के लोगों ने भी राहत महसूस की।

अमर उजाला से बातचीत में नंदलाल ने कहा करीब 11 साल पहले उनकी 21 वर्षीय पुत्री गाजियाबाद स्थित गांव निठारी में अपने बड़े भाई की ससुराल गई थी।

वह अपने छोटे भाई अमित की नौकरी के लिए 7 मई 2006 को मोनिंदर सिंह पंधेर की फैक्ट्री में गई थी। उसके बाद वह वापस नहीं लौटी। नम आंखों से नंदलाल ने बताया कि पुत्री की तलाश में वह पहले निठारी थाना गए, वहां सुनवाई नहीं हुई।
 

मुख्य आरोपी पंधेर हर बार फांसी की सजा से बचता रहा

nithari case - फोटो : अमर उजाला
इसके बाद वह एसएसपी कार्यालय भी गये, लेकिन वहां भी उन्हें न्याय नहीं मिला। इसके बाद उन्होंने अदालत की शरण ली, अदालत से उन्हें न्याय मिला।

नंदलाल ने कहा कि मोनिंदर सिंह के नौकर सुरेंद्र कोहली को सात बार फांसी की सजा सुनाई जा चुकी है, लेकिन मुख्य आरोपी पंधेर हर बार फांसी की सजा से बच निकला, इससे मन हर बार दुखी और बेचैन रहा है।

सोमवार को अदालत ने मोनिंदर सिंह पंधेर को फांसी की सजा सुनाकर उनके 11 साल से पीड़ा से जूझ रहे जख्म को काफी हद तक भर दिया है। 

नंदलाल का कहना था कि हमारे देशवासियों को अदालत पर विश्वास है कि कोहली और मोनिंदर को फांसी की सजा होने पर मेरी पुत्री और अन्य उन बच्चों के लिए सच्ची श्रद्धांजलि होगी जिन्हें इन दोनों नर पिशाचों ने बेरहमी से मारा है। नंदलाल ने यह भी कहा कि उन्होंने इसकी शपथ ली थी कि वह अपने जीते जी अपनी पुत्री के कातिलों को सजा दिलाकर ही दम लेंगे। उनका संकल्प पूरा हो गया है। 

 
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सफलता की ऊंचाइयां छूना चाहती थी बेटी

पंधेर की कोठी - फोटो : राजन राय/अमर उजाला
नंदलाल की बेटी जीवन में बड़े मुकाम को हासिल करना चाहती थी। वह काफी महत्वाकांक्षी थी। उसे बस एक ही जुनून था कि बड़ा मुकाम हासिल कर अपने परिवार और गांव का नाम रोशन करना है।

वह अपने भाइयों को भी आगे बढ़ाना चाहती थी। जिस दिन उसकी हत्या हुई थी उस दिन वह अपने भाई की नौकरी के लिए ही पंधेर की फैक्ट्री में गई थी।
  
मुआवजे की धनराशि भी न्याय के लिए खर्च कर दी      
नंदलाल अपनी बेटी के हत्यारों को फांसी की सजा के लिए पूरे हिम्मत और जोश के साथ लड़ते रहे। सरकार की ओर से मुआवजे के तौर पर नोएडा में नंदलाल को एक फ्लैट और पांच लाख रुपये की धनराशि मिली थी, जो कि उन्होंने अपनी बेटी को न्याय दिलाने के लिए अदालतों की चौखटों पर जा जाकर केस लड़ते-लड़ते खत्म कर दी।

नंदलाल और उसके परिवार की एक ही तमन्ना थी कि हर हाल में निठारी कांड के मुख्य आरोपी मोनिंदर सिंह पंधेर को भी फांसी हो। इसी शपथ के साथ वह आखिर तक लड़ते रहे। वर्तमान में नंदलाल के तीन बेटे हैं जो मेहनत मजदूरी करते हैं। नंदलाल अब अपने परिवार के साथ गांव पिपलिया में ही मजदूरी करके जीवन व्यतीत कर रहे हैं।
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