‘कार्बन टैक्स’ से बचने में दून दुनिया की मदद करेगा। भारतीय पेट्रोलियम संस्थान (आईआईपी) ने एक रिफाइनरी में यूनिट रिस्ट्रक्चरिंग का काम शुरू किया है। इसके जरिए कामर्शियल उड़ानों के संचालन के लिए फासिल फ्यूल संग मिलाने को 40 हजार टन बायो एविएशन टरबाइन फ्यूल उपलब्ध कराया जाएगा।
कार्बन टैक्स का हुआ ऐलान
दरअसल, यूरोपीय देशों ने अपने आसमान से गुजरने वाले विमानों के ईंधन से उत्सर्जित होने वाले कार्बन के नुकसान को देखते हुए विभिन्न एविएशन कंपनियों पर ‘कार्बन टैक्स’ का प्रावधान किया है।
ऐसे में केएलएमए, लुथांसा, फिन एयर, एयरो मैक्सिको, क्वांटास, यूनाइटेड एयर लाइंस जैसी सिविल एविएशन कंपनियां अपनी उड़ानों के लिए जेट ईंधन युक्त इंजन वाले विमानों के संचालन की दिशा में बढ़ रही हैं।
आस्ट्रेलिया संग आईआईपी में कार्यशाला
अपने देश में भी सिविल एविएशन का क्षेत्र तेजी से बढ़ रहा है। इसे देखते हुए आईआईपी में शुरू हुई दो दिवसीय कार्यशाला ‘जैव-जेट इंधन-भविष्य के पर्यावरण स्नेही, संधारणीय विमानन की कुंजी’ के पहले दिन आस्ट्रेलिया के प्रतिनिधि भी पहुंचे हैं।
डीजीसीए के इंद्रनील, गुरुचरण अरोड़ा, दिव्या वासुदेव, कमल ग्रोवर, डा. मिशेल डी सिल्वा, प्रो. ज्याफ स्टीवेंस, डा. ग्रेग मार्टिन, पाल वेब्ली, प्रो. फातिम अब्बास हसन आदि मौजूद रहे।
आईओसी, हिंदुस्तान पेट्रोलियम कर चुके परीक्षण
आईआईपी के जैट्रोफा को वैकल्पिक विमान ईंधन के रूप में प्रयोग किए जाने संबंधी परीक्षण इंडियन आयल कारपोरेशन और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कर चुके हैं। इसमें कनाडा का भी सहयोग रहा है। यह जेट ए-1 ईंधन के अनुरूप पाया गया है। जेट इंजन में इसका उपयोग किया जा सकता है।