इस बार भी चारधाम यात्रा में संचालित वाहनों की फिटनेस मैनुअल ही होगी। दरअसल, वाहनों की कंप्यूटरीकृत जांच के लिए ऑटोमेटिक टेस्टिंग लेन की योजना धरातल पर नहीं उतर सकी है।
सरकार ने पर्वतीय मार्गों पर संभावित हादसों की रोकथाम के लिए इस योजना को मंजूरी दी थी, लेकिन यह पांच साल से सरकारी फाइलों में धूल फांक रही है।
2009 से हुई थी भू्मि चिन्हित
हरिद्वार बाईपास मार्ग स्थित सहायक संभागीय परिवहन कार्यालय के समीप वर्ष 2009 में राज्य के पहले ऑटोमेटिक टेस्टिंग लेन के लिए भूमि चिह्नित की गई। इसमें अत्याधुनिक मशीनों द्वारा चारधाम यात्रा में संचालित वाहनों की फिटनेस होनी थी। ताकी पर्वतीय मार्गों पर तकनीकी खराबी के चलते होने वाले संभावित हादसों पर अंकुश लग सके।
मैनुअल चेकिंग में है खतरा
वर्तमान में चारधाम यात्रा में संचालित वाहनों की फिटनेस मैनुअल होती है, जिसे विश्वसनीय नहीं माना जाता। जानकारों की माने तो मैनुअल में वाहन की पूरी जांच संभव नहीं है। कुछ न कुछ कमी रह जाती है। ऑटोमेटिंग टेस्टिंग लेन में वाहन की यांत्रिक और बॉडी की बारीकी से जांच हो सकती है।
स्टेप बाई स्टेप जांच
ऑटोमेटिक टेस्टिंग लेन में हाईड्रोलिक प्लेटफार्म पर पहले वाहन के प्रदूषण की जांच होती है, इसके बाद अपर डिपर इंटीकेटर। फिर स्टेयरिंग में प्ले, इंजन की जांच, कमानी पट्टा लॉक को चेक किया जाता है। खामियां मिलने पर कुशल कारीगर उसे दुरुस्त करते हैं। वाहन का चेसिस (बॉडी) कहीं टूटा है, इसकी जांच भी आसानी से हो जाती है।