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कांग्रेस के पास लोकतंत्र की बात करने का नहीं है नैतिक अधिकार: जेपी नड्डा

Tue, 26 Jun 2018 06:39 PM IST
न्यूज डेस्क/अमर उजाला, देहरादून
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union minister jp nadda
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केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री और भाजपा संसदीय बोर्ड के सचिव जेपी नड्डा ने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि उसने उस दौरान प्रजातंत्र का गला घोंटा। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को प्रजातंत्र की बात करने का नैतिक अधिकार नहीं है। इतिहास गवाह है कि सत्ता पर बने रहने को कांग्रेस हर प्रकार के हथकंडे अपनाती रही। उन्होंने कहा कि जिन लाखों लोगों ने तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के कुत्सित प्रयासों के खिलाफ लड़ाई लड़ी, उनके प्रति वह नमन करते हैं। वह नौजवानों को यह संदेश देना चाहते हैं कि कांग्रेस का असल चेहरा क्या है।
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प्रदेश भाजपा कार्यालय में पत्रकार वार्ता में उन्होंने कहा कि भाजपा आज देश भर में आपातकाल के खिलाफ  काला दिवस मना रही है। 43 साल पहले 25 व 26 जून को कांग्रेस की तत्कालीन सरकार ने जो कृत्य किया, उसने उसका असली चरित्र दशार्या। आपातकाल की जगह-जगह चर्चा करके, गोष्ठियों के माध्यम से नौजवान पीढ़ी को भाजपा बता रही है कि इतिहास के पन्नों में कांग्रेस का असल चेहरा क्या है। आज कांग्रेस प्रजातंत्र की दुहाई दे रही है, उसने सत्ता पर बने रहने के लिए अलोकतांत्रिक हथकंडे अपनाए। फेमिली रूल को चलाने और अपने आप को सत्ता पर कायम रखने के लिए हर तरीके का हथकंडा कांग्रेस अपनाती रही है।

उन्होंने कहा कि जानकारियों के अनुसार जब आपातकाल लगा तो उस वक्त मंत्रिमंडल की बैठक नहीं हुई। आपातकाल पहले लगा और हस्ताक्षर बात में हुए। यह एक तरह से कांग्रेस के काम करने की प्रणाली को इंगित करता है। अपने आप को सत्ता में रखने, इलाहाबाद उच्च न्यायालय के फैसले से अपने आप को बचाने और उससे उभरी आवाज को रोकने का यह उसका कुत्सित प्रयास था।
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उन्होंने कहा कि आंतरिक सुरक्षा के नाम पर आपातकाल के दौरान लगभग 1.11 लाख लोगों को मीसा (मेंटेनेंस आफ  इंटरनल सिक्युरिटी एक्ट) के तहत बंद किया गया। 75818 लोगों डीआईआर( डिफेंस ऑफ इंडियन रूल्स) के तहत जेलों में ठूंसा गया। हजारों पत्रकारों को तंग किया गया। 26 जून को जब सेंसरशिप लगी थी, सभी अखबारों में ब्लैंक संपादकीय छापा गया था।

सुप्रीम कोर्ट से बचने के लिए इलाहाबाद उच्च न्यायालय के फैसले के खिलाफ  संसद में संशोधन लाए गए, जबकि विपक्ष के सारे नेता जेलों में बंद थे। तीन जजों की वरिष्ठता को दरकिनार कर मुख्य न्यायाधीश बनाया गया। न्यायालय को अपने अंतर्गत लेते हुए सारे फैसले लिए गए। यह न्यायपालिका पर सबसे बड़ा हमला था। चार जुलाई को देश के 26 संगठनों को प्रतिबंधित कर दिया गया, जिसमें आरएसएस व अन्य राजनीतिक दल भी थे।

नड्डा ने कहा कि तत्कालीन यूपी के इस पहाड़ी क्षेत्र से ही 200 से अधिक लोगों को जेल में ठूंसा गया। आरएसएस के प्रेम बुड़ाकोटी और बल्लभ भाई पांडे पर झूठे आरोप लगाकर बंद कर दिया गया। उन्होंने आपातकाल के खिलाफ खड़े होकर लड़ाई लड़ने वालों को नमन किया। पत्रकार वार्ता में प्रदेश महामंत्री नरेश बंसल, प्रदेश उपाध्यक्ष ज्योति गैरोला, विधायक खजान दास व गणेश जोशी, डॉ. देवेंद्र भसीन, महानगर अध्यक्ष विनय गोयल, बलजीत सोनी, अनिल गोयल, शमशेर पुंडीर, संजीव वर्मा, पुनीत मित्तल भी उपस्थित थे।
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