वर्तमान में इंडस्ट्रीज सेक्टर मंदी के दौर से गुजर रहा है। उपभोक्ता की खरीद क्षमता कम हुई है। पैसा न होने से बाजार मंदा पड़ा है। इन चुनौतियों का सामना उद्योग कर रहे हैं। आम बजट में एमएसएमई उद्योगों को आयकर में विशेष छूट मिलनी चाहिए और जो पैसा बाजार गायब है, उसे वापस लाने की जरूरत है। साथ ही ऐसे प्रोजेक्टों की व्यवस्था करनी होगी, जिससे उद्योगों के लिए बुनियादी ढांचा मजबूत हो सके।
-पंकज गुप्ता, अध्यक्ष, इंडस्ट्री एसोसिएशन आफ उत्तराखंड
कारोबार सुगमता के लिए इज आफ डुईंग बिजनेस सिस्टम को धरातल पर उतारने के लिए सरलीकरण होना चाहिए। पर्यटन, कृषि, आयुष, हेल्थ सबसे महत्वपूर्ण सेक्टर है। इन पर आधारित उद्योगों के लिए विशेष प्रोत्साहन की उम्मीद है। निवेशकों को सुविधाएं व प्रोत्साहन मिलेगा तो निवेश बढ़ेगा। इससे रोजगार के नए अवसर पर उपलब्ध होंगे।
-अनिल तनेजा, क्षेत्रीय निदेशक पीएचडी चैंबर आफ कामर्स
आम बजट में केंद्र सरकार एमएसएमई उद्योगों को दो प्रतिशत ब्याज पर ऋण देने की व्यवस्था करें तो छोटे उद्यमियों को बड़ी राहत मिलेगी। वहीं, प्रदेश में स्थापित उद्योगों से 50 प्रतिशत माल की खरीद को अनिवार्य किया जाना चाहिए। इससे छोटे उद्योगों में तैयार हो रहे उत्पादों को बाजार मिलेगा। आईएसओ ट्रेड मार्क वाले उद्योगों को पांच साल तक टैक्स छूट का लाभ दिया जाए।
-महेश शर्मा, संयोजक, उत्तराखंड इंडस्ट्रीज वेलफेयर एसोसिएशन
सोने की ज्वैलरी पर तीन प्रतिशत जीएसटी को घटा कर दो प्रतिशत करने की घोषणा बजट में होने की उम्मीद करते हैं। ज्वैलरी कारोबार को बढ़ावा देेने के लिए निर्यात नीति में प्रोत्साहन देने की जरूरत है। केंद्र सरकार ने जिस पर तरह जीएसटी में टैक्स के लिए अलग-अलग स्लैब तय किए हैं। उसी तर्ज पर आयकर के लिए स्लैब बना कर टैक्स निर्धारित किया जाए।
-पंकज मैसून, प्रदेश महासचिव, उत्तराखंड स्वर्णकार एसोसिएशन