लेकिन प्रदेश को अधिक झटका ग्रीन बोनस न मिलने से लगा। पिछले करीब एक दशक से प्रदेश में काबिज रही सरकारों ने इस मांग को केंद्र से बेहद गंभीरता के साथ उठाया। हिमालयी राज्यों को ग्रीन बोनस देने की पैरोकारी करने वालों में केंद्र में कैबिनेट मंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक भी शामिल रहे हैं।
राज्यसभा सांसद अनिल बलूनी भी ग्रीन बोनस की लगातार वकालत कर रहे हैं। मगर पर्यावरणीय संरक्षण के दबाव में विकास की भारी कीमत चुका रहे उत्तराखंड पर फिलहाल केंद्र की कृपा दृष्टि नहीं पड़ी।
ऐसे में अब उत्तराखंड की उम्मीदें नीति आयोग और 15वें वित्त आयोग पर टिक गई हैं। ये दोनों आयोग हिमालयी राज्यों को पर्यावरणीय सेवाओं के एवज में केंद्रीय सहायता दिए जाने पर सैद्धांतिक रूप से सहमत हैं।
अभी वित्त आयोग और नीति आयोग की रिपोर्ट आने वाली है। नीति आयोग हमारी मांग से सहमत है। हमने सभी विषयों पर काफी गंभीरता से चिंता हुई है। इन पर केंद्र सरकार बहुत गंभीरता से विचार कर रहा है।
-त्रिवेंद्र सिंह रावत, मुख्यमंत्री