ट्रांसजेंडर अदिति ने कहा- मुझे ताली नहीं बजानी, जॉब चाहिए...
ट्रांसजेंडर अदिति शर्मा ने अपनी बात रखी तो हॉल में मौजूद सभी लोगों ने उनकी बात का समर्थन करते तालियां बजाकर उनका स्वागत किया। उन्होंने कहा कि हम भी इंसान हैं, हमें भी बराबरी का अधिकार मिलना चाहिए। लोग हमसे कहते हैं, तुम तो तालियां बजाकर भी कमा लोगे। अदिति ने कहा वह पढ़ी-लिखी हैं, ताली नहीं बजाना चाहती हैं, सम्मान से कोई नौकरी करना चाहती है। यूसीसी में इसके लिए व्यवस्था होनी चाहिए।
आसान हो शादी का पंजीकरण और बच्चे गोद लेने की प्रक्रिया
इंद्रेश गोयल, सिद्धार्थ अग्रवाल ने शादी का पंजीकरण कराने की प्रक्रिया को ग्राम पंचायत स्तर पर कराने का सुझाव दिया। इसके अलावा बच्चे गोद लेने की प्रक्रिया को भी आसान बनाने की वकालत की। उन्होंने कहा कि इन दोनों की प्रक्रिया इतनी जटिल है कि लोग चाहते हुए भी ऐसा नहीं कर पाते हैं। सिद्धार्थ ने लिव इन रिलेशनशिप को एक विकृत्ति बताते हुए कहा कि देवभूमि को यह कतई मंजूर नहीं। डॉ. पल्लवी ने कहा कि पति-पत्नी का आधार कार्ड अलग-अलग जगह का बना होता है, ऐसे में शादी का पंजीकरण कराने में दिक्कत आती है।
विज्ञान की कसौटी पर बने नया कानून
डॉ. दुर्गेश पंत ने कहा जब सभी धर्मों के लोगों को कोविड के बाद एक वैक्सीन लग सकती है, सभी का मलमूत्र एक एसटीपी में जाता है, ग्रेविटी सब पर एक समान लागू होती है, ऐसे में सभी के लिए समान कानून बनाने में दिक्कत क्या है। इस बात को हमें विज्ञान की कसौटी पर रखकर परखना और सोचना होगा।
शहीदों के माता-पिता को भी मिले हक
डीजीपी अशोक कुमार की पत्नी अलकनंदा ने कहा कि सेना में शहीद होने वाले हमारे जवानों के माता-पिता के अधिकारों का भी कानून में ध्यान रखा जाना चाहिए। कई बार देखने में आता है कि शहीद की विधवा पत्नी बाद में दूसरी शादी कर लेती है और उनके माता-पिता को सरकार की ओर से कोई भी सुविधा नहीं मिल पाती है। इसलिए संपत्ति के अधिकार में प्रतिशतता तय की जानी चाहिए।
इन्होंने भी दिए सुझाव
पार्थ जुयाल, अनुज शर्मा, डॉ. गीतांभर ध्यानी, प्रीतम भर्तवाण, मनीषा नेगी, राकेश पंडित, प्रो. नरवेंद्र सिंह, डॉ. राकेश डंगवाल, प्रो. दिनेश शास्त्री, बसंती बिष्ट, डॉ. चेतना पोखरियाल, रंजना देसाई सहित दून विवि की कई छात्राओं ने भी अपने सुझाव साझा किए।
बसंती बिष्ट और प्रीतम भरतवाण ने सुनाया गीत
जन संवाद के दौरान जागर सम्राट प्रीतम भरतवाण ने अपनी बात रखी तो समिति के सदस्यों ने उन्हें दो लाइनें जागर सुनाने का आग्रह किया, जिस पर उन्होंने जागर की कुछ लाइनें सुनाई। इसी तरह जागर गायिका बसंती बिष्ट ने भी अपने सुमधुर स्वरों से गरमा-गरम माहौल को हल्का फुल्का बना दिया।