देहरादून। उत्तराखंड संयुक्त ट्रेड संघर्ष समिति की अगुवाई में शुक्रवार को कई ट्रेड यूनियनों के पदाधिकारियोें, कर्मचारियोें, श्रमिकों ने राष्ट्रीय प्रतिरोध दिवस मनाया। इस दौरान ठेका प्रथा समाप्त करने, न्यूनतम पेंशन 8000 रुपये प्रतिमाह करने, सरकारी प्रतिष्ठानों का निजीकरण बंद करने, न्यूनतम वेतन 18000 रुपये प्रतिमाह करने समेत 20 सूत्री मांगों को लेकर श्रमिकों ने गांधी पार्क में धरना दिया और पीएम मोदी का पुतला फूंका। राष्ट्रीय प्रतिरोध दिवस में सीटू, एटक, इंटक के अलावा बैंक, रक्षा समेत कई सरकारी सेवाओं के कर्मचारी शामिल हुए।
धरने में वक्ताओं ने कहा कि केंद्र सरकार देशी व विदेशी कारपोरेट घरानों के इशारे पर चल रही है। केंद्र व राज्य सरकारों द्वारा सार्वजनिक व सरकारी प्रतिष्ठानों को एक एक करके बंद किया जा रहा है। कारपोरेट घरानों के दबाव में रेलवे का निजीकरण किया जा रहा है। केंद्र सरकार श्रम कानूनों को समाप्त कर श्रमिकों को गुलाम बनाने की ओर धकेल रही है। रक्षा, रेलवे, बैंक, बीमा जैसे प्रतिष्ठानों को साजिश के तहत बड़े पूंजीपतियों को सौंपने की तैयारी है। राज्य कर्मचारी स्वास्थ्य बीमा के स्थान पर निजी बीमा कंपनियां लाई जा रही हैं। भविष्य निधि को मालिकों का शेयर कम करके पूंजीपतियों को फायदा पहुंचाने की साजिश हो रही है। राज्य सरकार द्वारा न्यूनतम वेतन 8300 रुपये तय किया गया है जो राज्य के मजदूरों के साथ धोखा है। धरने को इंटक के प्रदेश अध्यक्ष व पूर्व मंत्री हीरा सिंह बिष्ट, एटक के प्रदेश महामंत्री अशोक शर्मा, उपाध्यक्ष समर भंडारी, जगमोहन मेहंदीरत्ता, दिनेश नौटियाल, शेर सिंह राणा, आशा वर्कर्स की प्रांतीय अध्यक्ष शिवा दुबे, राम सिंह भंडारी, भोजन माता यूनियन की प्रदेश महामंत्री मोनिका, ईश्वरपाल, सीटू के महामंत्री लेखराज समेत कई वक्ताओं ने संबोधित किया।
ट्रेड यूनियनों की प्रमुख मांगें
-देश में ठेका प्रथा को बंद किया जाए।
-रेलवे समेत तमाम सरकारी प्रतिष्ठानों का निजीकरण तत्काल बंद किया जाए।
-न्यूनतम पेंशन 6000 रुपये प्रतिमाह की गारंटी और सभी सूचकांक आधारित पेंशन हो।
-सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों का विनिवेश व उनकी बिक्री बंद की जाए।
-नई पेंशन स्कीम को समाप्त कर पुरानी पेंशन व्यवस्था बहाल की जाए।
-श्रमिकों के लिए घोषित न्यूनतम मजदूरी को 8300 रुपये की जगह 18000 मासिक किया जाए।
-ऊर्जा निगमों समेत तमाम निगमों में कार्यरत आउटसोर्स व संविदा कर्मचारियों का नियमितीकरण किया जाए।
-आसमान छूती महंगाई पर नियंत्रण के लिए ठोस कदम उठाए जाएं।
-राज्य की औद्योगिक इकाइयों में काम के घंटे आठ किए जाएं।
-भोजन माताओं, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को राज्य कर्मचारी का दर्जा दिया जाए।