केंद्रीय मंत्री उमा भारती शनिवार को एक प्रेस कांफ्रेंस में जगद्गुरू शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती के बयानों पर कहा कि वो उनसे इत्तेफाक नहीं रखती।
उमा भारती ने पत्रकारों के सवालों के जवाब देते हुए कहा कि शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती ने साईं मंदिरों में हिंदुओं के न जाने का बयान क्यों दिया इस बारे में उन्हें कोई जानकारी नहीं है।
गौरतलब है कि शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती ने साईं मंदिरों में हिंदुओं को न जाने की सलाह दी है। यही नहीं इस मामले में एफआईआर होने के बावजूद स्वरूपानंद सरस्वती ने कहा है कि वो अपने बयान से पीछे हटने वाले नहीं हैं।
साईं बाबा ने खुद को कभी नहीं बताया भगवान
उमा भारती ने स्वरूपानंद सरस्वती के बयान पर कहा कि खुद साईं बाबा ने अपने आप को भगवान नहीं बताया है और न ही उनके भक्त उन्हें अवतार मानते हैं। निजी तौर पर मैं खुद साईं बाबा को मानती हूं।
जगद्गुरू शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती पिता समान है। यह सब आस्था का मामला है। इसको लेकर विरोध नहीं होना चाहिए।
इससे पहले कल ही स्वरूपानंद ने साईं मंदिरों में हिंदू देवताओं को अपमानित करने का आरोप लगाया।
उमा भारती और शंकराचार्य में ठनी
साईं बाबा के पक्ष में उमा भारती द्वारा बोलना शंकराचार्य खेमे को रास नहीं आया। उमा और शंकराचार्य समर्थकों के बीच ठन गई है।
रविवार की शाम भारत साधु समाज का सम्मेलन खुद शंकराचार्य के कनखल मठ में बुलाया गया है। इस सम्मेलन में साईं बाबा और उमा भारती के विरुद्ध प्रस्ताव पारित किए जाने की उम्मीद है।
भारत साधु समाज के राष्ट्रीय महामंत्री स्वामी हरिनारायणानंद ने शनिवार की शाम शंकराचार्य से भेंट की। गौरतलब है कि स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती भारत साधु समाज के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी है। दोनों संतों के बीच देर तक वार्ता चलती रही।
उमा भारती के खिलाफ आ सकता है प्रस्ताव
वार्ता के बाद स्वामी हरिनारायणानंद ने बताया कि रविवार की शाम छह बजे कनखल स्थित शंकराचार्य मठ में भारत साधु समाज का सम्मेलन बुला गया है। इसमें अनेक साधु-संत भाग लेंगे।
उन्होंने संकेत दिया कि साधु समाज के इस सम्मेलन में साईं बाबा के विरुद्ध औपचारिक प्रस्ताव लाएगा। उमा भारती के खिलाफ भी प्रस्ताव आ सकता है। सम्मेलन मे गंगा प्रदूषण, आचार-व्यवहार शुद्धि आदि अनेक मुद्दे भी उठाए जाएंगे।
गुरू कहने पर कड़ा ऐतराज
शंकराचार्य ने कहा कि हमारे आराध्य देवों का अपमान इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। कोई भी गुरु राम-कृष्ण से बड़ा नहीं हो सकता।
जहां तक साईं बाबा का सवाल है, उन्हें गुरु कहना भी नहीं चाहिए। एक मुसलमान को गुरु मानने वालों का दायित्व है कि वे भटकन से बाहर निकलें।
अब सभी की समझ में आ गया है कि साईं मंदिरों में जाने से किसी को लाभ मिलने वाला नहीं हैं। कईं विभागों के अधिकारी शंकराचार्य के संमुख दंडवत करने पहुंचे।