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लोगों के व्यवहार में बदलाव से गंगा होगी स्वच्छ

Sat, 04 Jul 2015 10:43 AM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
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नमामि गंगे महाभियान की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) के लिए देहरादून में बुलाई गई दो दिवसीय राष्ट्रीय बैठक के दूसरे दिन शुक्रवार को गंगा स्वच्छता के लिए लोगों के व्यवहार में परिवर्तन पर जोर दिया गया।
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बैठक के समापन पर कहा गया कि गंगा स्वच्छता के प्रति लोगों में जागरूकता लाने के लिए इको टास्क फोर्स, नेहरू युवा केंद्र, एनएसएस का सहयोग लिया जाएगा। इसके साथ ही पड़ोसी सभी राज्य गंगा की स्वच्छता और अविरलता के लिए साथ मिलकर काम करेंगे।

वन अनुसंधान संस्थान (एफआरआई) में राष्ट्रीय गंगा स्वच्छता मिशन की ओर से आयोजित हितधारकों की राष्ट्रीय बैठक के दूसरे और अंतिम दिन बिहार के लिए 10 मॉडल प्रस्तावित किए गए। प्रस्ताव रखा गया कि गंगा बेसिन वाले राज्यों में गंगा किनारे औषधीय पादप लगाए जाएंगे।
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इसके अलावा मृदा, बांस, घास, स्थानीय प्रजातियों की पहचान, कृषि वानिकी, उच्च गुणवत्ता के औषधीय प्रजातियों का रोपण एवं किसान पौधशाला की स्थापना की जाएगी। साथ ही बिहार और झारखंड में आजीविका सुधार के लिए काम पर भी जोर दिया गया।

वक्ताओं ने कहा कि गंगा की स्वच्छता के लिए वास्तविक प्रयासों के रूप में समीपवर्ती राज्यों को साथ मिलकर काम करना चाहिए। मुख्य अतिथि भारतीय वानिकी अनुसंधान एवं शिक्षा परिषद के महानिदेशक डॉ. अश्वनी कुमार ने कहा कि विस्तृत परियोजना रिपोर्ट के लिए प्रत्येक राज्य के मुख्य विषयों की पहचान की जानी चाहिए।

कहा कि हमें गंगा की स्वच्छता से संबंधित पूर्व अनुभवों जैसे गंगा कार्ययोजना से सीख लेनी चाहिए। बैठक में संस्थान की निदेशक डा. सविता, प्रमुख वन संरक्षक श्रीकांत चंदोला, डॉ. आरबीएस रावत, नंदिता त्रिपाठी आदि मौजूद रहे।

गंगा किनारे बंजर भूमि को करना होगा हराभरा : नंदिनी
गंगा की स्वच्छता और निर्मलता के लिए गंगा किनारे बंजर भूमि को हरा-भरा करना होगा। हमें किसी भी समारोह में प्लास्टिक की वस्तुओं के इस्तेमाल से बचना होगा। यह कहना है परमार्थ निकेतन की नंदिनी त्रिपाठी का। नंदिता ने यहां एफआरआई में आयोजित बैठक में कहा कि गंगा की स्वच्छता के लिए विभिन्न संगठनों को आगे आना चाहिए।

स्वच्छता के साथ आजीविका के साधन बढ़ेंगे : तिवारी
आयुष मंत्रालय में राष्ट्रीय औषधीय पादप बोर्ड के सदस्य डॉ. ललित तिवारी ने कहा कि गंगा को अविरल बनाने के लिए गंगा के किनारे औषधीय पौधों को लगाना होगा। इससे गंगा के पानी में औषधीय गुण बने रहेंगे और जड़ी-बूटी की खेती से आजीविका के साधन भी बढ़ेंगे।

नदियों पर बांध बनेंगे पर धारा प्रभावित नहीं होगी
केंद्रीय जल संसाधन मंत्री उमा भारती ने कहा कि नदियों पर बांध बनेंगे लेकिन उसकी मुख्य धारा प्रभावित न हो, यह सुनिश्चित करना होगा। गंगा को प्रदूषण से बचाने के लिए उन्होंने कांवड़ियों से पालीथिन का इस्तेमाल न करने और ऋषिकेश में राफ्टिंग कैंप लगाने वालों से मल-मूत्र के निस्तारण के लिए जरूरी कदम उठाने की अपील की।

शुक्रवार को डामकोठी में संवाददाताओं से बातचीत में केंद्रीय मंत्री ने कहा कि गंगा प्रदूषित न हो इसके लिए आयुष मंत्रालय गंगा किनारे औषधीय पौधे लगाएगा। इसकी देखरेख टास्क फोर्स करेगी। योजना की डीपीआर (डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट) को भी हरी झंडी दे दी गई है। प्रयाग, बनारस, हरिद्वार एवं कानपुर में गंगा की स्वच्छता के लिए फंड जारी कर दिया है।

अगले साल हरिद्वार और ऋषिकेश में गंगा किनारे एसटीपी (सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट) के फेज एक का कार्य पूरा हो जाएगा। इस योजना के तहत गंगा में जा रहे सीवरेज को किनारे पर ही रोका जाएगा। फिर राज्य सरकार उसका उपयोग सुनिश्चित करेगी। 12 बड़े शहरों में सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट एवं सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट लगाए जाएंगे।

एनजीटी (नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल) की ओर से हरिद्वार व ऋषिकेश में पॉलीथिन पर प्रतिबंध लगाने के मुद्दे पर केंद्रीय मंत्री ने कहा कि ट्रिब्यूनल की कमान न्यायाधीश संभालते हैं। लिहाजा वह इस पर कुछ नहीं बोलना चाहती।

ट्रिब्यूनल ने जो निर्णय लिया वह सही होगा। वह ही अपने निर्णय को सिरे चढ़ाने का प्लान तैयार करेंगे। इस दौरान नगर विधायक मदन कौशिक, जिलाध्यक्ष कुलदीप गुप्ता, महामंत्री राजीव शर्मा, भाजयुमो जिलाध्यक्ष हरजीत सिंह, नवनीत परमान, प्रवीण शर्मा, विमल कुमार आदि भाजपाई मौजूद रहे।

कांवड़ियों से अपील
केंद्रीय मंत्री ने कांवड़ियों से पॉलीथिन का इस्तेमाल न करने की अपील की। कहा कि कांवड़ मेले के दौरान मल-मूत्र सीधे गंगा में न जाए इसके लिए वह प्रदेश सरकार से बात करेंगी। जो भी मदद राज्य सरकार की ओर मांगी जाएगी उसे पूरा किया जाएगा।

राफ्टिंग के खिलाफ नहीं
ऋषिकेश में राफ्टिंग को लेकर केंद्रीय मंत्री ने कहा कि वह इसके खिलाफ नहीं है। लेकिन गंगा किनारे लगाए गए कैंपों में ठहरने वाले लोगों की गंदगी सीधे नदी में जाती है। ऐसे में कैंप प्रबंधकों को मल-मूत्र के निस्तारण के लिए ठोस और कड़े कदम उठाने होंगे।

अवैध कब्जे छुड़ाएं, पौधे लगाएं
वन अनुसंधान संस्थान में दो दिनी राष्ट्रीय बैठक के अंतिम दिन शुक्रवार को गंगा किनारे वन विभाग की सैकड़ों हेक्टेयर भूमि पर अवैध कब्जों के मामले भी सामने आए। वन विभाग अधिकारियों ने कहा कि गंगा की स्वच्छता के लिए इन अवैध कब्जों को छुड़ाकर वहां पौधरोपण करना होगा।

बैठक में वन विभाग के अधिकारियों एवं वैज्ञानिकों ने कहा कि उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड एवं पश्चिम बंगाल से होकर गुजरने वाली गंगा के किनारों पर बड़े पैमाने पर वन भूमि पर अवैध कब्जे हैं। गंगा की निर्मलता एवं अविरलता के लिए वन विभाग को अपनी भूमि से कब्जे छुड़ाने होंगे।

अधिकारियों ने कहा कि मुजफ्फरनगर में हाल ही में 1600 हेक्टेयर वन भूमि से कब्जा छुड़ाया गया है। वन विभाग की इस भूमि पर लोग वर्षों से कब्जा जमाए थे। वैज्ञानिक ओमवीर सिंह, वन विभाग के अधिकारियों ने गंगा किनारे अवैध कब्जों पर चिंता जताई।

औषधीय पौधों के रोपण से होगी गंगा स्वच्छ
पहाड़ में गंगा किनारे भोजपत्र, वन तुलसी, वन ककड़ी, थुनेर, घिंघारू, तेजपात, बुरांस, काफल, तिमुर, पहाड़ी अनार, हिसालु के पौधे लगाने पर जोर दिया गया। पूर्व प्रमुख वन संरक्षक एसके सिंह ने कहा कि वन विभाग की ओर से इन औषधीय पौधों की नर्सरी तैयार की गई है। गंगा किनारे इनके पौध रोपण से गंगा स्वच्छ और अविरल बनी रहेगी।
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