पुराने रिकॉर्ड से आयोग विश्वसनीयता खो चुका : बॉबी पंवार
बेरोजगार संघ के नेता बॉबी पंवार ने कहा कि बात अगर विश्वसनीयता की है तो अब तक की सभी बातों को देखकर विश्वसनीयता खो चुकी है। कई ऐसे ऑडियो क्लिप वायरल हुए जिनमें ओएमआर शीट खाली छोड़ने तक की बात हो रही थी। आयोग के अध्यक्ष जीएस मार्तोलिया कह रहे थे कि एक भी पेपर लीक तो छोड़ो एक भी सवाल बाहर नहीं आने दिया जाएगा। इन सब बातों से अब विश्वसनीयता का सवाल ही नहीं उठता। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड का युवा इस वक्त सीबीआई जांच चाह रहा है। जितने युवा यहां बैठे हैं उससे कहीं ज्यादा अन्य जगहों पर आंदोलन कर रहे हैं। युवाओं की मांग है पेपर रद्द हो और इसकी निष्पक्ष जांच हो।
हर बार पेपर लीक होता है और हर बार बनती है एसआईटी
एसआईटी की बात पर युवाओं ने कहा कि जब भी पेपर लीक होता है तब जांच के लिए एसआईटी बनती है। एसआईटी जांच का कोई नतीजा नहीं निकलता। बॉबी पंवार ने कहा कि वर्ष 2016 में वीपीडीओ का पेपर लीक हुआ था। उस वक्त भी एसआईटी बनी और जांच बेनतीजा रही। पंवार ने कहा कि वह इसी परेड ग्राउंड की टंकी पर 12 घंटे चढ़े रहे थे। इसके बाद जेल भी जाना पड़ा था। सिस्टम की किसी बात पर उन्हें विश्वास नहीं है। पंवार ने कहा कि इस मामले में उन्हें भी शक के घेरे में लिया जा रहा था कि बॉबी पर भी शिकंजा कसा जाएगा। ऐसे में वह चाहते हैं कि सीबीआई जांच हो और इसकी शुरुआत भी उनसे हो ताकि दूध का दूध और पानी का पानी हो सके।
रायपुर में क्यों हुआ मुदकमा, एसएसपी ने बताया
युवा बार-बार इस बात को उठा रहे थे कि पेपर लीक हरिद्वार में हुआ और इसका मुकदमा रायपुर में दर्ज हुआ। इस पर भी सरकार की मंशा पर युवाओं ने सवाल उठाया। उनके इस सवाल का जवाब देने के लिए एसएसपी अजय सिंह आगे आए। उन्होंने युवाओं से कहा कि यह नियम है कि जहां आयोग या प्रतिष्ठान होगा वहीं पर मुकदमा दर्ज होता है। यूकेएसएसएससी रायपुर क्षेत्र में है। ऐसे में उनकी शिकायत पर रायपुर थाने में ही मुकदमा दर्ज हो सकता है। वर्ष 2021 और इससे पहले भी जब कभी आयोग की परीक्षाओं में इस तरह की बात सामने आई तो मुकदमे रायपुर थाने में ही दर्ज किए गए। राज्य लोक सेवा आयोग से संबंधित परीक्षा में धांधली की बात सामने आई थी तो इसका मुकदमा हरिद्वार में दर्ज हुआ था। इसका कारण है कि यह आयोग हरिद्वार में है।
सेवानिवृत्त जस्टिस वर्मा को दी जिम्मेदारी पर भी उठाया सवाल
युवाओं ने एसआईटी जांच की निगरानी सेवानिवृत्त जस्टिस बीएस वर्मा को सौंपे जाने पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि पूर्व जस्टिस वर्मा के राजनीतिक ताल्लुकात हैं। वह पहले पंचायती राज विभाग में भी तैनात रह चुके हैं। इसके अलावा उनका भाई भी भाजपा का नेता है। साथ ही अब उनका सगा भतीजा हरिद्वार जिला पंचायत का अध्यक्ष है। ऐसे में वह किस तरह से निष्पक्ष होकर इस जांच की निगरानी करेंगे यह बड़ा सवाल है।