हर काम देखरेख में हुआ, यह भविष्य में दिखाने के लिए सीसीटीवी फुटेज को सुरक्षित भी रख लिया गया। मगर, एक बार भी इसे देखने की जहमत नहीं उठाई गई कि यहां किसने क्या हरकत की। यह सब लापरवाही है या कुछ और यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा, लेकिन एसटीएफ जांच के दायरे में अब सब आ गए हैं।
एसएसपी अजय सिंह ने बताया कि इस मामले में क्लीन चिट किसी को नहीं दी गई है। इस मामले में अगर आयोग में किसी पर आपराधिक मामला नहीं बना तो लापरवाही की रिपोर्ट तैयार की जाएगी। इसकी एक रिपोर्ट शासन को भेजी जाएगी ताकि गंभीर लापरवाही बरतने वालों पर कार्रवाई हो।
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लखनऊ में भी तैनात होना था एक कर्मचारी
परीक्षा आयोजित कराने से ज्यादा पेपर बनना, छपना, सेट तैयार करना, पैकेजिंग करना ये सब गोपनीय काम होते हैं। किसी प्राइवेट कंपनी के भरोसे हजारों युवाओं का भविष्य नहीं सौंपा जा सकता, इसके लिए आयोग के कर्मचारियों और अधिकारियों को भी इन सब कामों की निगरानी करनी होती है। अपनी प्रेस में तो सब मौजूद होते हैं। कंपनियों की प्रेस में भी ड्यूटी लगाई जाती है। मगर, लखनऊ की प्रेस में कोई भी कर्मचारी मौजूद नहीं था। सवाल उठ रहे हैं कि ये भी लापरवाही है या कुछ और?