30 करोड़ से भी ज्यादा की अवैध कमाई
एसटीएफ की पड़ताल में अब तक 150 से अधिक अभ्यर्थियों के नाम सामने आ चुके हैं। जबकि, स्क्रीनिंग में केवल 100 अभ्यर्थियों को ही संदिग्ध माना गया था। एसटीएफ का अनुमान है कि इनकी संख्या 250 तक भी पहुंच सकती है। ऐसे में यदि पेपर बिक्री के इस धंधे का आकलन किया जाए तो तकरीबन 30 करोड़ रुपये इधर से उधर हुए हैं। हरेक सौदागर ने अपने हिसाब से कीमत तय की और वसूल की।
एसटीएफ ने छह आरोपियों के खिलाफ तैयार की चार्जशीट
पेपर लीक मामले में शुरुआत में पकड़े गए छह आरोपियों के खिलाफ एसटीएफ ने चार्जशीट तैयार कर ली है। इस चार्जशीट को 24 सितंबर से पहले कोर्ट में दाखिल किया जाएगा। इस मामले में अब तक गिरफ्तार 41 आरोपियों में से किसी को जमानत नहीं मिली है। लिहाजा, नियमानुसार सभी के खिलाफ बारी-बारी से चार्जशीट कोर्ट में दाखिल की जाएगी।
बता दें कि हत्या के मामले को छोड़कर अन्य मामलों में यदि आरोपी जेल में बंद हैं तो चार्जशीट दो माह में दाखिल की जाती है। हत्या में यह अवधि तीन माह की है। पेपर लीक में भी पहले दिन की गिरफ्तारी को 24 सितंबर को दो माह पूरे हो रहे हैं। ऐसे में एसटीएफ ने 24 जुलाई को गिरफ्तार किए गए छह आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट तैयार कर ली है। जल्द ही कोर्ट में चार्जशीट दाखिल कर दी जाएगी। सभी आरोपियों पर मुकदमे में दर्ज प्रत्येक धारा में चार्जशीट तैयार हुई है।
ये हैं आरोपी
- शूरवीर सिंह
- कुलवीर सिंह (डेल्टा कोचिंग सेंटर करनपुर का मालिक)
- मनोज जोशी (पीआरडी जवान, आयोग का पूर्व कर्मचारी)
- गौरव नेगी
- जयजीत दास (आरएमएस कंपनी का कर्मचारी)
- मनोज जोशी (कनिष्ठ सहायक, सितारगंज न्यायालय)
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ये हैं धाराएं
- आईपीसी 420 (धोखाधड़ी), 467, 468, 471 (सभी विभिन्न प्रकार के फर्जी दस्तावेजों को तैयार करने से संबंधित), 34 (एकराय होकर अपराध करना)
- उत्तर प्रदेश सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम -1988