यह था मामला
अधीनस्थ सेवा चयन आयोग ने छह मार्च 2016 को ग्राम पंचायत विकास अधिकारी (वीपीडीओ) के 196 पदों पर भर्ती की परीक्षा कराई थी। इसका परिणाम उसी साल 26 मार्च को जारी किया था। इस भर्ती परीक्षा में आरोप लगे थे कि ओएमआर शीट को दो सप्ताह तक किसी गुप्त स्थान पर रखकर उससे छेड़छाड़ की गई थी। इसके बाद रिजल्ट जारी हुआ था।
इस भर्ती में दो सगे भाईयों के टॉपर बनने के साथ ही ऊधमसिंह नगर के एक गांव के 20 से ज्यादा युवाओं के चयन का आरोप लगा था। एक दिसंबर 2017 को वीपीडीओ भर्ती को निरस्त कर दोबारा से लिखित परीक्षा कराने के आदेश हाईकोर्ट ने दिए थे। आयोग ने 25 फरवरी 2018 को दूसरी बार परीक्षा कराई।
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पूर्व परीक्षा में चयनित हुए 196 उम्मीदवारों में से दूसरी परीक्षा में केवल आठ का चयन हुआ था। इस मामले में अब तक ओएमआर सीट से छेड़छाड़, दो सगे भाई पास होने, परीक्षा के टॉपर को 10वीं से 12वीं तक जाने में चार साल लगने और ऊधमसिंहनगर के महुआडाबरा गांव के 20 से ज्यादा युवाओं के चयन की पुष्टि भी हुई थी।