यूक्रेन में एमबीबीएस की पढ़ाई कर रही फलई गांव की अवंतिका सहित 300 से अधिक छात्र-छात्राएं एक बंकर में शरण लिए हुए हैं। उनके पास खाने-पीने का सामान भी सीमित रह गया है। अवंतिका ने वीडियो कॉल के जरिए अपने माता-पिता से बातचीत कर वहां के भयावह हालात की जानकारी दी तो परिजन भी भावुक और बेचैन हो उठे।
रुद्रप्रयाग जिले से चार छात्र-छात्राएं यूक्रेन में एमबीबीएस के छात्र हैं। छात्रा व फलई गांव निवासी अवंतिका ने शनिवार सुबह 9 और दोपहर बाद 4 बजे अपनी माता रचना भट्ट से वीडियो कॉल के जरिए बातचीत की। अवंतिका ने एक वीडियो अपनी मां को भेजा, जिसमें उसने बताया कि वह व उसकी सहेलियां एक बंकर में रह रहे हैं। उनके पास चिप्स, बिस्कुट और बोतलबंद पानी ही रह गया है। छात्राओं ने बताया कि वहां के हालात ठीक नहीं हैं। वे ज्यादा दिनों तक ऐसे नहीं रह पाएंगे।
उन्होंने बताया कि सभी छात्र-छात्राएं स्वयं ही बॉर्डर पार करने की सोच रहे थे, लेकिन फिर दोपहर को कुछ लोगों को सुरक्षा बलों ने बीच में ही रोक दिया था। इधर, रचना भट्ट ने बताया कि उन्हें और अन्य बच्चों के माता-पिता को भारत सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर पूरा भरोसा है कि उनके बच्चे सुरक्षित लौट आएंगे। उधर, नागजगई के उत्कर्ष शुक्ला, ऊखीमठ की लिपाक्षी कुंवर और अगस्त्यमुनि के अंकित चंद्र के माता-पिता ने भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अपने बच्चों को सकुशल वापस लाने की गुहार लगाई है। लिपाक्षी की माता सुधा कुंवर ने दोपहर को अपनी बेटी से वीडियो कॉलिंग पर बात की। उन्होंने बताया कि सभी बच्चे खौफजदा हैं।
यूक्रेन में फंसे टिहरी जिले के युवाओं ने अपने परिजनों को चिंता नहीं करने की बात कही है। उनका कहना है कि वहां हालात जरूर खराब हैं, लेकिन वह सभी होटल की बेसमेंट में सुरक्षित हैं। होटल में कार्यरत युवाओं ने बताया कि फिलहाल उनके पास खाने-पीने की कोई समस्या नहीं है। भारत सरकार से वतन वापसी की गुहार लगाई है। दूसरी ओर, प्रतापनगर के पूर्व विधायक विक्रम सिंह नेगी ने विदेश मंत्री केंद्र सरकार को पत्र भेजकर यूक्रेन में फंसे सभी भारतीय नागरिकों को जल्द सकुशल वापस लाने की मांग की है।
प्रतापनगर ब्लॉक के स्यालगी गांव निवासी नरेश कलूड़ा ने बताया कि वह अपने चार अन्य साथियों के साथ यूक्रेन की राजधानी कीव में फंसे हुए हैं। वे वहां होटल में कार्यरत हैं। बताया कि यहां के हालात खराब जरूर हैं, लेकिन वह अपने उत्तराखंड के साथियों के साथ सुरक्षित हैं। नरेश ने बताया कि रूसी सेना कीव के निकट पहुंच गई है। स्थानीय प्रशासन से उन्हें बाहर न निकलने का सुझाव दिया है। वह बीते तीन दिनों से होटल के बेसमेंट में छिपे हुए हैं। नरेश के साथ नई टिहरी सुरसिंगधार कांडा गांव के प्रवीन पुंडीर पुत्र पूरण सिंह पुंडीर, हरीश पुंडीर, नरेंद्रनगर आर्स गांव के सुरेंद्र रावत पुत्र ज्ञान सिंह रावत, श्यामपुर ऋषिकेश के मनोज सिंह पुत्र वीर सिंह भी कीव स्थित होटल में ही हैं।
पांच युवाओं ने बताया कि वह करीब एक साल पूर्व यूक्रेन आए थे। एक होटल किराए पर लेकर व्यवसाय चला रहे हैं। होटल भी अच्छा चल रहा था, लेकिन अब अचानक युद्ध ने सब कुछ बदलकर रख दिया है। नरेश कलूड़ा ने अपने पिता राकेश सिंह सहित परिजनों से अपील की है वह घबराएं नहीं है। पूरी तरह से सुरक्षित हैं। भारतीय दूतावास से बातचीत चल रही है। अन्य युवाओं ने भी अपने परिजनों को संयम रखने की अपील की है। कहा कि धमाकों की गूंज तो सुनाई दे रही है, लेकिन होटल के बेसमेंट में सभी सुरक्षित हैं। खाना और पानी पर्याप्त मात्रा में है। नरेश ने बताया कि उत्तराखंड के कई अन्य युवा कीव सिटी के होटलों, रेस्त्रां में काम करते हैं। वह सभी लोग आपस में ग्रुप चैट, कॉल के माध्यम से जुड़े हुए हैं।
यूक्रेन में फंसे लोगों की सकुशल वापस के लिए की पूजा
यूक्रेन में फंसे भारतीय की सकुशल वापसी के लिए टिहरी के पूर्व विधायक किशोर उपाध्याय ने राज-राजेश्वरी मंदिर में पूजा-अर्चना की। पूर्व विधायक उपाध्याय, भाजपा जिलाध्यक्ष विनोद रतूड़ी ने बताया कि टिहरी विधानसभा के गौंसारी गांव के करीब 40 लोग यूक्रेन के बॉर्डर वाले देश पोलैंड में होटल और अन्य इंडस्ट्री में नौकरी करते हैं। बताया कि गांव के प्रधान रणजीत सिंह भंडारी ने सभी को सकुशल वापसी के लिए प्रयास करने की मांग की है। उपाध्याय ने कहा कि टिहरी के अब तक 14 लोगों की पुष्टि हो चुकी है, जो यूक्रेन में फंसे हैं। इसी तरह पोलैंड, हंगरी, बेलारूस, रूस आदि देशों में सैकड़ों लोग टिहरी और उत्तराखंड के हैं। उन्होंने छाती गांव, नई टिहरी, नवाघर, बौराड़ी में यूक्रेन के फंसे लोगों के परिजनों से भेंटकर विश्वास दिलाया कि सरकार उन्हें वापस सुरक्षित घर लाएगी। राजराजेश्वरी मंदिर में जाकर उन्होंने युद्ध समाप्त करने और टिहरी और उत्तराखंड के लोगों की सकुशल वापसी की प्रार्थना की। इस मौके पर भाजपा मंडलाध्यक्ष विजय कठैत, उदय रावत, भगवती रतूड़ी, सुरेश तोपवाल, दिनेश भट्ट आदि मौजूद थे। संवाद
यूक्रेन में फंसे छात्रों की सकुशल वतन वापसी की मांग
यूथ कांग्रेस और राष्ट्रीय छात्र संघ ( एनएसयूआई) ने यूक्रेन में फंसे कोटद्वार सहित प्रदेश के सभी छात्र-छात्राओं के सकुशल वतन वापसी की मांग केंद्र सरकार से उठाई है। दोनों संगठनों ने मांग को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को ज्ञापन प्रेषित किए हैं।
यूथ कांग्रेस के कोटद्वार विधानसभा इकाई के अध्यक्ष विजय रावत ने कहा कि यूक्रेन में कई भारतीय छात्र फंसे हुए हैं, जिसमें उत्तराखंड और कोटद्वार के छात्र भी शामिल हैं। ज्ञापन में उन्होंने सभी छात्र-छात्राओं के सकुशल वापसी की मांग की है। ज्ञापन प्रेषित करने वालों में पंकज खत्री, मनीष चौहान, रिजवान, मनोज गुसाईं, प्रमोद रावत आदि शामिल रहे। उधर, एनएसयूआई के नगर अध्यक्ष अविरल पंत के अगुवाई में कार्यकर्ताओं ने प्रेषित ज्ञापन में कहा कि यूक्रेन और रूस के बीच जारी तनाव और युद्ध के चलते हजारों भारतीय छात्र यूक्रेन में फंसे हैं। कहा कि छात्रों के वतन वापसी में देरी होने की दशा में बड़ी हानि हो सकती है। ज्ञापन प्रेषित करने वालों में सागर बिष्ट, प्रियांश नेगी, सोहन सिंह, मयंक नेगी आदि शामिल रहे।
यूक्रेन में फंसे भारतीय छात्र अब बुरे हालात से गुजर रहे हैं। एक छात्र के पिता का कहना है कि रोज नई सूचना जारी होने और एंबेसी की ओर से सहयोग नहीं मिलने से छात्र पोलैंड बॉर्डर की तरफ पैदल चलने को मजबूर हैं, लेकिन अब वहां से भी वापस लौटने के लिए कह दिया गया है। छह डिग्री माइनस तापमान में कई किमी पैदल चलने से उनका सब्र जवाब देने लगा है। दो दिन से खाने के लिए केवल चिप्स और पानी की ही व्यवस्था हो पाई है।
रुड़की के आर्यन चौधरी यूक्रेन की अलीव इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहे हैं। युद्ध छिड़ने के बाद अन्य छात्रों की ही तरह वह भी यूक्रेन में फंसे हैं। आर्यन के पिता अजय चौधरी का कहना है कि एक दिन पहले एंबेसी की ओर से बेटे को सूचना दी गई थी कि हॉस्टल छोड़कर पोलैंड बॉर्डर पर पहुंचें। यहां से उन्हें भारतीय अधिकारियों की मदद से भारत लाया जाएगा। शनिवार को आर्यन समेत भारत के 15 छात्र कैब के जरिये पोलैंड के लिए रवाना हुए। 70 किमी के सफर के बाद गाड़ियों का लंबा जाम और हजारों लोगों के बॉर्डर पहुंचने के कारण कार फंस गई। इसके बाद सभी छात्र किमी पैदल चल किसी तरह बॉर्डर पहुंचे। आर्यन के पिता का कहना है कि वहां भारतीय दूतावास से कोई अधिकारी मौजूद नहीं था।
पोलैंड के अधिकारियों ने कोई सूचना नहीं होने के चलते उन्हें वापस लौटने के लिए कह दिया। आर्यन के मुताबिक, इसी बीच भारतीय दूतावास से दूसरा मैसेज आया। इसमें उन्हें वापस हॉस्टल जाने के लिए कहा गया। इसके बाद उनका ग्रुप भीषण ठंड में वापस 35 किमी पैदल चला और कैब कर हॉस्टल के लिए रवाना हुआ। अजय चौधरी का कहना है कि बेटे के पास खाने-पीने का भी इंतजाम नहीं है। वहां सर्दी बहुत ज्यादा है और हालात बहुत खराब हैं। दो दिन से खाने के लिए केवल चिप्स और पानी ही मिला है। छात्रों के पास नकदी का भी अभाव है। सभी के पास जितना कैश है, उसी से मिलजुलकर काम चला रहे हैं। वहीं, अब हॉस्टल में खाने की दिक्कत पेश आने लगी है। ऐसे में अजय ने भारत सरकार से छात्रों की मदद की अपील की है।