उत्तराखंड लोक सेवा आयोग को भर्तियों की जिम्मेदारी तो दी गई, लेकिन सरकारी सिस्टम की सुस्ती से 20 हजार से ज्यादा पदों पर भर्तियों का अभियान तेजी नहीं पकड़ पाया। आयोग ने तीन बार कैलेंडर जारी किए, इसके बावजूद कई भर्तियां तय तिथियों के हिसाब से नहीं निकल पाईं।
अभी भी कई भर्तियों के प्रस्ताव शासन में ही लटके हुए हैं। आयोग अध्यक्ष डॉ. राकेश कुमार ने जिम्मेदारी संभालने के बाद भर्तियों के लिए जो तेजी दिखाई थी, समूह-ग की भर्तियों के लिए भी उसी अंदाज में काम करने की कोशिश की गई। भर्तियां मिलने के बाद आयोग ने एक कैलेंडर जारी किया था।
इसके तहत पुलिस कांस्टेबल, पटवारी-लेखपाल, फॉरेस्ट गार्ड, सहायक लेखाकार, बंदीरक्षक, कनिष्ठ सहायक, मानचित्रकार-प्रारूपकार की भर्तियां निकाली गईं। इस दौरान चारा सहायक, सहायक कृषि अधिकारी, उप निरीक्षक पुलिस, पर्यावरण पर्यवेक्षक, अन्वेषक कम संगणक, अवर अभियंता की भर्तियों को समय से शुरू नहीं किया जा सका।
15 से ज्यादा के प्रस्ताव कमियां होने से लौटाई गए
ज्यादातर भर्तियों के जो प्रस्ताव आयोग के पास आए थे, उनमें से 15 से ज्यादा के प्रस्ताव कमियां होने से लौटाई गए थे। कुछ को छोड़कर बाकी अभी तक वापस नहीं आए। ऐसे में आयोग की भर्ती एक्सप्रेस काफी सुस्त पड़ गई। लगातार पत्राचार भी किए जा रहे हैं। मुख्य सचिव इसकी निगरानी करते हुए कई बार निर्देश जारी कर चुके हैं। बावजूद प्रस्ताव वापस नहीं आ रहे।
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भर्तियां तो बढ़ीं, लेकिन मानव संसाधन नहीं
आयोग के पास अपनी भर्तियों के अलावा समूह-ग की भर्तियों का बोझ तो बढ़ गया, लेकिन उस हिसाब से आयोग मानव संसाधन नहीं जुटा पाया। हालात ये हो गए कि बाद में आयोग को रिटायर्ड कर्मियों का भी सहारा लेना पड़ा। माना जा रहा कि इससे आयोग पर काम और परफॉर्मेंस का भारी बोझ बना हुआ है।