यूकेडी की एकता की मुहिम के तहत पूर्व केंद्रीय मंत्री दिवाकर भट्ट की वापसी पर उठ रहे सवालों पर दल के महाधिवेशन संयोजक त्रिवेंद्र पंवार ने स्थिति साफ की।
उन्होंने कहा कि उनका भट्ट से न तो कोई मतभेद है और न ही उनकी वापसी पर ऐतराज है। उनकी वापसी दल हित में सर्वसम्मति से लिया गया फैसला है, जिससे संगठन को मजबूती मिलेगी। साफ किया कि बीते तीन वर्ष के सभी निष्कासन वापस ले लिए गए हैं।
दिवाकर भट्ट का वर्ष 2011 में पार्टी के तत्कालीन केंद्रीय अध्यक्ष त्रिवेंद्र पंवार ने ही निष्कासन किया था। भट्ट के निष्कासन से पार्टी दो खेमों में बंट गई। ऐसे में चार वर्ष बाद दल के शीर्ष नेताओं की एकता को लेकर शुरू की मुहिम के तहत दिवाकर भट्ट की वापसी हुई है, जिसके बाद लगातार यह बात उठ रही थी कि त्रिवेंद्र उनकी वापसी से नाखुश हैं।
शनिवार को त्रिवेंद्र ने पत्रकार वार्ता बुलाकर स्थिति साफ कर दी। कहा कि दिवाकर भट्ट का जब निष्कासन हुआ था तो उसमें सभी शीर्ष नेताओं की सहमति थी। पिछली बातों को भुलाकर एक मंच पर आकर कांग्रेस-भाजपा का विकल्प जनता के सामने पेश करना होगा।
उन्होंने कहा कि दल महाधिवेशन के बाद 2017 के विधानसभा चुनाव की तैयारी में जुटेगा। इस मौके पर दल के प्रवक्ता मनमोहन लखेड़ा, लताफत हुसैन, अनूप नेगी सहित कई पदाधिकारी मौजूद रहे।
बयानबाजी पर ऐरी सख्त
दल की एकता की मुहिम पर केंद्रीय अध्यक्ष काशी सिंह ऐरी ने सभी पदाधिकारियों को अनुशासन बनाए रखने की हिदायत दी है। कहा कि अगर कोई संगठन पदाधिकारी एकता को लेकर आपत्तिजनक बयान देता है तो उसके विरुद्ध तुरंत अनुशासनात्मक कार्यवाही की जाएगी।
कहा कि वापसी की मुहिम केवल कार्यकर्ताओं के लिए नहीं है बल्कि ऐसे संगठन और व्यक्ति भी दल में जुड़ सकते हैं, जो हमारी विचारधारा से मेल खाते हों। बताया कि भगवानपुर उपचुनाव में संगठन के प्रत्याशी गुरमैल सिंह हैं, जिनके लिए संगठन पुरजोर तरीके से प्रचार कर रहा है।