फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Result: यूपी से अलग होने के बाद उत्तराखंड ने शिक्षा गुणवत्ता के क्षेत्र में लगाई छलांग, टॉपरों को पीछे छोड़ा

Sun, 26 Apr 2026 08:41 PM IST
Alka Tyagi बिशन सिंह बोरा, अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून

सार

राज्य गठन के 25 वर्षों में उत्तराखंड बोर्ड के छात्रों ने अच्छे अंक लाकर अपनी क्षमता साबित की है। पिछले कई वर्षों के परीक्षा परिणामों को देखें तो उत्तराखंड के परीक्षार्थियों ने यूपी के छात्रों के सर्वाधिक अंक के रिकॉर्ड को तोड़ा है।
विज्ञापन
रिजल्ट आने के बाद छात्रों में खुशी - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

उत्तर प्रदेश से अलग राज्य बनने के बाद उत्तराखंड ने शिक्षा गुणवत्ता के क्षेत्र में छलांग लगाई है। खासतौर पर बोर्ड परीक्षाओं में यहां के छात्र लगातार बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं। इस साल राज्य की बेटी गीतिका और सुशीला ने 12 वीं में संयुक्त रूप से सर्वाधिक 98 फीसदी अंक प्राप्त करने के साथ ही यूपी की टॉपर शिखा वर्मा के 97.60 फीसदी अंकों को पीछे छोड़ दिया है। जो दर्शाता है कि छोटा राज्य होने के बावजूद उत्तराखंड ने शिक्षा की गुणवत्ता पर ध्यान दिया है।

विज्ञापन


राज्य गठन के 25 वर्षों में उत्तराखंड बोर्ड के छात्रों ने अच्छे अंक लाकर अपनी क्षमता साबित की है। पिछले कई वर्षों के परीक्षा परिणामों को देखें तो उत्तराखंड के परीक्षार्थियों ने यूपी के छात्रों के सर्वाधिक अंक के रिकॉर्ड को तोड़ा है। ग्रामीण और पहाड़ी क्षेत्रों से आने वाले यहां के विद्यार्थियों का उत्कृष्ट प्रदर्शन यह दर्शाता है कि सीमित संसाधनों के बावजूद पहाड़ में प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है। हमारा बोर्ड, हमारे बच्चे जैसी भावना ने भी राज्य स्तर पर आत्मविश्वास बढ़ाया है।

हालांकि, इस तस्वीर का दूसरा पक्ष भी है। पिछले कुछ वर्षों में उत्तराखंड बोर्ड में पंजीकरण कराने वाले छात्रों की संख्या में गिरावट देखी जा रही है। वर्ष 2023 में इंटरमीडिएट परीक्षा में पंजीकृत छात्र-छात्राओं की संख्या 127324 थी, जो पिछले तीन साल में घटकर इस साल 102986 रह गई। जबकि हाईस्कूल में वर्ष 2023 में पंजीकृत छात्र-छात्राओं की संख्या 132114 से घटकर इस साल 112266 है।
विज्ञापन


UK Board Result 2026: खेतों में गेहूं काटते हुए मिला जिला टॉपर, खबर सुन भावुक हुए किसान पिता, भर आया गला

विज्ञापन

इसका एक बड़ा कारण सीबीएसई और आईसीएसई जैसे राष्ट्रीय बोर्डों के प्रति बढ़ता आकर्षण हैं। अभिभावक और छात्र इन बोर्डों को बेहतर अवसर, आधुनिक पाठ्यक्रम और प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए अधिक अनुकूल मानते हैं। इसके अलावा शिक्षा के बुनियादी ढांचे, शिक्षकों की कमी और आधुनिक सुविधाओं के अभाव जैसी चुनौतियां भी सामने है। राज्य में सरकारी और अशासकीय स्कूलों के इन छात्र-छात्राओं को कई बार सरकार की ओर से मिलने वाली मुफ्त किताबें समय से नहीं मिलती। यदि राज्य को अपनी शिक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाना हैं तो इन मुद्दों पर गंभीरता से काम करना होगा।

प्रथम और द्वितीय श्रेणी वाले अधिक
उत्तराखंड बोर्ड की हाईस्कूल परीक्षा में शामिल हुए छात्र-छात्राओं में 28.20 प्रतिशत प्रथम श्रेणी से पास हुए हैं। वहीं, 42.86 विद्यार्थी द्वितीय श्रेणी से उत्तीर्ण हैं। जबकि 13.75 प्रतिशत तृतीय श्रेणी से पास हुए हैं। इसी तरह इंटरमीडिएट में भी 41.32 प्रतिशत प्रथम और 34.82 प्रतिशत द्वितीय श्रेणी वाले हैं। मात्र 0.32 प्रतिशत तृतीय श्रेणी से पास हुए हैं।

उत्तराखंड बोर्ड के जो नतीजे हैं, उसे देखने से स्पष्ट है कि प्रथम और द्वितीय श्रेणी से पास होने वाले छात्र-छात्राओं की संख्या अधिक है। जो दर्शाता है कि राज्य में शिक्षा गुणवत्ता में सुधार हुआ है।
- डॉ. मुकुल सती, निदेशक माध्यमिक शिक्षा
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें