I
300 रुपये अनुदान मिलने के बावजूद भी उपभोक्ता नहीं कर रहे गैस का प्रयोग
I
Iराजधानी में पीएम उज्ज्वला योजना के चूल्हों की लौ बुझती जा रही है। पिछले तीन महीने के आंकड़े बताते हैं कि योजना के तहत मात्र 40 फीसदी लोग ही नियमित गैस सिलिंडर भरवा रहे हैं। 60 फीसदी उपभोक्ता या तो लंबे समय से गैस सिलिंडर की रिफिलिंग नहीं करा रहे हैं, या फिर वह सिलिंडर का प्रयोग करना छोड़कर लकड़ी के चूल्हों का प्रयोग करने लगे हैं।I
Iदरअसल, जनपद देहरादून में पीएम उज्ज्वला योजना के तहत 54,473 उपभोक्ताओं को निशुल्क गैस कनेक्शन दिए गए हैं। इनमें से आधे उपभोक्ता भी गैस सिलिंडर नहीं भरवा रहे हैं। यही नहीं सिलिंडर पर अनुदान की राशि 300 रुपये मिलने के बावजूद ये लोग गैस रिफिलिंग कराने को तैयार नहीं हैं। विभागीय अधिकारियों ने बताया कि जिले में इंडेन 24,677, हिन्दुस्तान पेट्रोलियम 10,783 व भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन की ओर से 15,544 उपभोक्ताओं को कनेक्शन दिए गए हैं।I
I
I
I
मात्र इंडेन गैस की रिफिलिंग रही 44.57 फीसदी
I
Iपीएम उज्ज्वला योजना के सबसे अधिक 24,677 कनेक्शन इंडेन कंपनी के पास हैं। इंडेन की ओर से जुलाई में 10,600, अगस्त में 11,459 और सितंबर में 11,123 सिलिंडरों की रिफिलिंग की गई, जो औसत 44.57 फीसदी रही। जबकि, एचपी और बीपीसी का रिफिलिंग प्रतिशत आधे से भी कम रहा। अधिकारियों ने बताया कि तीनों एजेंसियों का रिफिलिंग औसत करीब 40 फीसदी तक ही रहा।
I
I
I
I522 रुपये जुटाना हो रहा मुश्किलI
Iयोजना के तहत उपभोक्ताओं को एक साल में 12 सिलिंडरों पर अनुदान मिल रहा है, जो हर माह 300 रुपये है। जबकि, मौजूदा समय में घरेलू गैस सिलिंडर की कीमत 822 रुपये है। ऐसे में इन उपभोक्ताओं को 522 रुपये जुटाना मुश्किल हो रहा है। जबकि, इसके बजाय लकड़ी के चूल्हों पर भोजन बनाना आसान लग रहा है। वहीं, सामान्य गैस कनेक्शन पर 16 रुपये का अनुदान दिया जा रहा है।I
I
I
Iमजदूरी करके जीवन यापन कर रहे हैं। ऐसे हर माह सिलिंडर लेना संभव नहीं है। हररोज जंगलों से लकड़ी जुटाकर भोजन पकाने का इंतजाम कर रहे हैं। - अनिता, सपेरा बस्ती, मोथरोवाला I
I
I
Iमहंगाई के दौर में सिलिंडर भराना मुश्किल हो रहा है। इसकी बजाय लकड़ी से भोजन बनाना सस्ता पड़ता है। सरकार को निशुल्क सिलिंडर देने की व्यवस्था करनी चाहिए। - कुसुम, मोथरोवाला I
I
I
Iसरकार की ओर से पीएम उज्ज्वला कनेक्शन लाभार्थी को प्रत्येक सिलिंडर की रिफिलिंग पर अनुदान दिया जाता है। अनुदान राशि के बारे में उपभोक्ताओं को जागरूक किया जाएगा। भोजन बनाने में गैस का इस्तेमाल काफी सस्ता रहता है। - केके अग्रवाल, डीएसओI