असिस्टेंट प्रोफेसर और जूनियर रिसर्च फेलोशिप के लिए आयोजित हुए यूजीसी नेट के पहले पेपर ने अभ्यर्थियों को उलझा दिया तो दूसरे पेपर से राहत मिली। इस साल यूजीसी ने नेट (नेशनल एलिजिबिलिटी टेस्ट) का पैटर्न बदल दिया है। इस वजह से तीन के बजाय केवल दो पेपर ही आए। इनमें से पहले पेपर को अभ्यर्थियों ने मुश्किल बताया। उनका कहना था कि सवालों के हिसाब से समय थोड़ा अधिक देना चाहिए था।
राजधानी में रविवार को 21 केंद्रों पर यूजीसी नेट का आयोजन हुआ। पहली बार इस परीक्षा का पैटर्न बदला गया है, इसीलिए अभ्यर्थी असमंजस में थे। परीक्षा के बाद किसी ने नए पैटर्न को बढ़िया बताया तो किसी ने पुराने पैटर्न को ज्यादा आसान करार दिया। यूजीसी ने पहले पेपर में अभ्यर्थियों को रिसर्च मैथोडोलॉजी से लेकर हायर एजुकेशन सिस्टम के पैमानों पर परखा।
पहला पेपर टीचिंग एंड रिसर्च एप्टीट्यूड का हुआ। इसमें यूजीसी ने टीचिंग एप्टीट्यूड के अलावा, रीडिंग कांप्रिहेंसन, रीजनिंग, डाटा इंटरप्रेटेशन, इंफोर्मेशन एंड कम्यूनिकेशन टेक्नोलॉजी, पिपुल एंड एनवायरमेंट और हायर एजुकेशन सिस्टम से जुड़े 50 सवाल पूछे। पेपर-2 में संबंधित विषय से जुड़े कुल 100 प्रश्न पूछे गए। प्रत्येक प्रश्न के लिए दो अंक निर्धारित थे। पहले पेपर के लिए एक घंटा और दूसरे पेपर के लिए दो घंटे का समय दिया गया। राजधानी में 21 केंद्रों पर हुई परीक्षा में 12,632 अभ्यर्थी पंजीकृत थे। इनमें से 27 प्रतिशत अभ्यर्थी अनुपस्थित रहे।
पेपर-1 के लिए मिला एक घंटे का समय कम था। यूजीसी को इस पेपर के लिए कम से कम डेढ़ घंटे का समय देना चाहिए था। वैसे बदला हुआ पैटर्न अच्छा है।
-संतोष शर्मा, विकासनगर
पेपर-1 और पेपर-2 दोनों ही बेहतर हैं। पेपर-1 के सिलेबस में कई बदलाव किए गए हैं जो कि अच्छा प्रयास है। पेपर-2 थोड़ा लंबा था लेकिन मुश्किल नहीं था।
-अंजना सैनी, रुड़की
नेट के दोनों ही पेपर का बदला हुआ पैटर्न बेहतर है। पेपर-1 थोड़ा लंबा लगा क्योंकि इसमें 60 मिनट में 50 सवाल हल करने थे। पेपर-2 के लिए दो घंटे पर्याप्त हैं।
-हरेंद्र मलिक, हरिद्वार
यूजीसी ने नेट का पैटर्न बदलकर दिनभर की थकाऊ परीक्षा से निजात दी है। पेपर-1 में कुछ और बदलाव करने की जरूरत है। पेपर-2 बेहतर रहा है। परीक्षा अच्छी रही।
-परमेंद्र सिंह, सहारनपुर