जमीन के फर्जीवाड़े में अदालत ने एक व्यक्ति को दो साल चार माह की कैद और 1500 रुपए अर्थदंड की सजा सुनाई है।
मालिक के पहुंचने से खेल का खुला
आरोपी ने खुद को पांच बीघा जमीन का मालिक बताया था। रजिस्ट्री के वक्त असली मालिक के पहुंचने से खेल का खुलासा हुआ। आरोपी मौके से धरा गया, जबकि उसके तीन साथी अब तक फरार हैं।
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मामला वर्ष 2011 का रायपुर थाना क्षेत्र का है। अभियोजन पक्ष के अनुसार बसंत विहार निवासी निशा चंद को सलीम नाम के एक व्यक्ति ने सहस्त्रधारा रोड स्थित डांडा लखौंड में पांच बीघा जमीन दिखाई।
तीन लाख रुपए प्रति बीघा के हिसाब से ढाई बीघा जमीन का सौदा किया। बताया कि जमीन संजय वासुदेव की है, जो रजिस्ट्री के दौरान कचहरी में मिलेगा।
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निशा चंद 29 नवंबर 2011 को कचहरी पहुंची तो वहां सलीम के साथ हारून, रियासत अली और एक अन्य व्यक्ति मिला, जिसने अपना नाम संजय वासुदेव बताया। उस व्यक्ति के पास इस नाम की वोटर आईडी भी थी।
जमीन न बेचने की बात कही
निशा ने संजय को आईसीआईसीआई बैंक का 7.5 लाख रुपए का चैक दे दिया। इस बीच खुद को संजय वासुदेव बता रहा दूसरा व्यक्ति मौके पर पहुंचा और कहा कि वह जमीन का मालिक है। उसने जमीन न बेचने की बात कही।
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उसे देखते ही सलीम, हारून और रियासत अली भाग निकले, जबकि फर्जी संजय वासुदेव को दबोच लिया गया। पूछताछ में उसने अपना नाम जयप्रकाश निवासी सरसावा, सहारनपुर बताया।
बाद में जांच में पुष्टि हुई कि जयप्रकाश ने संजय वासुदेव के नाम से फर्जी वोटर आईडी बनाई थी। न्यायिक मजिस्ट्रेट द्वितीय रिंकी साहनी की अदालत में हुई सुनवाई में अभियोजन की ओर से छह गवाह पेश किए गए।
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सहायक अभियोजन अधिकारी अल्पना थापा ने बताया कि अदालत ने आरोपी को दोषी करार देते हुए सजा सुना दी। हारून, सलीम और रियासत अली अब तक पुलिस गिरफ्त से बाहर हैं।
उम्र के आधार पर कम सजा की गुहार
सुनवाई के दौरान सजा सुनाए जाने पर जयप्रकाश ने अदालत से कहा कि उसकी उम्र 61 वर्ष है। वह बीमार है और उसकी पत्नी का निधन हो चुका है।
कहा कि परिवार में उसकी एक अविवाहित पुत्री है और उसकी पैरवी करने वाला भी कोई नहीं। उसने कहा कि वह भविष्य में अपराध की पुनरावृत्ति नहीं करेगा।
जयप्रकाश 29 नवंबर 2011 से न्यायिक अभिरक्षा में जेल में बंद है। विशेषज्ञों के मुताबिक तब से अब तक की जेल में बिताई अवधि से उसकी सजा कट जाएगी।