उत्तराखंड के उत्तरकाशी स्थित कुज्जन गांव के
ग्रामीणों से आपदा का साया उठता नजर नहीं आ रहा है। जून की आपदा से बंद
पड़ी गांव की सड़क न खुलने से काश्तकारों के दो हजार क्विंटल आलू सड़क पर
सड़ने की कगार पर है।
80 परिवार प्रभावित
आसपास के गांवों
में हालांकि गढ़वाल विकास निगम ने समर्थन मूल्य पर आलू खरीदा है, लेकिन इस
गांव से एक भी दाना आलू भी नहीं खरीदा। 80 परिवारों वाले कुज्जन गांव के
ग्रामीणों की आजीविका का मुख्य जरिया नकदी फसलें हैं।
इस बार
ग्रामीणों की आलू फसल पूरी तरह से तैयार हो गई है, लेकिन जून की आपदा से
गांव की सड़क कई जगहों पर भूस्खलन से बंद होने से आलू मंडी तक नहीं पहुंचा
रहे हैं। ग्रामीणों की आलू से भरी सैकड़ों बोरियां 15 दिनों से गांव के पास
सड़क किनारे तिरपाल से ढककर रखी हैं।
सड़क खुलने का इंतजार
कुज्जन
के ग्रामीण सड़क खुलने का इंतजार कर रहे हैं।आसपास के आपदा प्रभावित
गांवों से हालांकि गढ़वाल विकास निगम ने समर्थन मूल्य पर आलू की खरीद की,
लेकिन इस गांव से एक भी आलू नहीं खरीदा।
गांव के रविंद्र सिंह व
कमल देई का कहना है कि वह नकदी फसलों को बेचकर ही अपनी आजीविका चलाते हैं।
यदि उनके आलू सड़ जाएंगे तो वे अपने बच्चों का पालन पोषण कैसे करेंगे।
सड़क खुलने में लगेगा समय
ग्रामीणों
की मांग पर हालांकि जिला प्रशासन ने आपदा मद में 7 लाख रुपए का बजट
स्वीकृत कर लोनिवि से सड़क खुलवाने का काम शुरू करवा दिया है, लेकिन अभी
सड़क खुलने में समय लग सकता है। खास बात है कि लोनिवि द्वारा बनाई गई 12
किमी की यह सड़क कुछ सालों तक बीआरओ तो कुछ सालों तक एनटीपीसी के पास भी
रही, लेकिन एनटीपीसी कंपनी के चले जाने के बाद से यह सड़क किसी भी विभाग के
पास नहीं है। यही कारण है कि जून से अब तक सड़क नहीं खुल पाई।