प्रदेश में बिजली उत्पादन बढ़ाने के लिए मंगलवार को एक कार्यक्रम में मुख्यमंत्री हरीश रावत की मौजूदगी में दो समझौता पत्रों (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए। पहला समझौता उत्तराखंड शुगर्स और दूसरा वैकल्पिक जल ऊर्जा केंद्र भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान रुड़की के बीच हुआ।
उत्तराखंड जल विद्युत निगम लिमिटेड (यूजेवीएनएल) मुख्यालय में आयोजित कार्यक्रम में सीएम हरीश रावत ने कहा कि ऊर्जा के दो निगम यूजेवीएनएल और पिटकुल लाभ कमाने वाले निगम बन गए हैं। उम्मीद है कि यूपीसीएल और उरेडा भी लाभ की स्थिति में आकर विकास और रोजगार सृजन में निवेश कर सकते हैं।
यूजेवीएनएल और उत्तराखंड शुगर्स के मध्य ऊधमसिंह नगर में बगास आधारित 16 मेगावाट की नादेही और 22 मेगावाट की बाजपुर परियोजना के लिए समझौता पत्र हस्ताक्षरित होने पर सीएम ने इस पहल की सराहना की। उन्होंने कहा कि आगे भी सरकारी गन्ना मिलों द्वारा कम से कम 100 मेगावाट तक ऊर्जा उत्पादन किया जा सकेगा। इसके अलावा यूजेवीएनएल और वैकल्पिक ऊर्जा केंद्र आईआईटी रुड़की के मध्य सतही छोटी टरबाइन के शोध और विकास के लिए भी समझौता हुआ।
सरकार को 15 करोड़ लाभांश दिया
यूजेवीएनएल और पावर ट्रांसमिशन आफ उत्तराखंड लिमिटेड (पिटकुल) ने 2015-16 वित्त वर्ष के अंतिम लाभ का एक हिस्सा करीब 15 करोड़ रुपये सरकार को दिया। कार्यक्रम में प्रमुख सचिव ऊर्जा उमाकांत पंवार और दोनों निगमों के एमडी एसएन वर्मा ने सीएम को इस धनराशि का चेक सौंपा।
इसमें यूजेवीएनएल ने 10.14 करोड़ और पिटकुल के 5.01 करोड़ रुपये का लाभांश शामिल है। इस मौके पर उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग के अध्यक्ष सुभाष कुमार, विधायक विजयपाल सजवाण, यूपीसीएल के प्रबंध निदेशक एमके जैन, उत्तराखंड शुगर्स के प्रो. अरुण भट्टाचार्य, रविकांत सेठ, राहुल कुमार गोयल, मोहन खत्री आदि भी शामिल रहे।