उत्तराखंड के विभिन्न विभागों के दो लाख सरकारी कर्मचारी राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के बैनर तले विभिन्न मांगों पर दफ्तर छोड़ बृहस्पतिवार से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले गए।
हड़ताल के पहले दिन ही सरकारी कार्यालयों में व्यापक असर नजर आया। दफ्तरों में सन्नाटा पसरा रहा। कामकाज ठप रहा, सैकड़ों लोग बैरंग लौटे। राजधानी में कर्मचारियों ने परेड ग्राउंड में जोरदार प्रदर्शन कर सरकार को ताकत का अहसास कराया।
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शासनादेश जारी होने तक हड़ताल जारी
कर्मचारियों ने ऐलान किया कि मांगों के निस्तारण के संबंध में शासनादेश जारी होने तक हड़ताल जारी रहेगी। बता दें कि कर्मचारी तीन दिन से कार्य बहिष्कार पर थे।
इस बीच शासन स्तर पर उनकी वार्ता भी हुई, लेकिन जीओ न आने से कर्मचारी माने नहीं। कार्रवाई नहीं हुई तो उन्होंने बृहस्पतिवार से हड़ताल शुरू कर दी।
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यहां नहीं हुआ काम
विकास भवन, मंडी, एमडीडीए, व्यापार कर, आईटीआई, तहसील, समाज कल्याण, उद्यान, कृषि और सहकारिता आदि विभागों में कामकाज ठप रहा।
मांगा समर्थन
राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद ने डिप्लोमा फार्मेसिस्ट एसोसिएशन, राजकीय नर्सेज संघ, मिनिस्टीरियल फेडरेशन, डिप्लोमा इंजीनियर्स एसोसिएशन, शिक्षक संघ और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी महासंघ से भी समर्थन मांगा है।
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किसानों पर सबसे ज्यादा असर
हड़ताल का सबसे अधिक असर किसानों के लिए चलाई जाने वाली योजनाओं पर पड़ा है। 19 से 29 अक्तूबर तक प्रदेशभर में प्रस्तावित कृषक महोत्सवों की तैयारी नहीं हो सकी है। हड़ताल लंबी चली तो इस बार महोत्सव नहीं हो सकेंगे। इससे किसानों को बीज, कृषि यंत्र आदि का वितरण नहीं किया जा सकेगा।
इनकी भी सुनिए
मुख्य सचिव ने शुक्रवार (आज) को हमें वार्ता के लिए बुलाया है। हम बातचीत के लिए जाएंगे, लेकिन आंदोलन तब तक जारी रखा जाएगा जब तक शासनादेश जारी नहीं हो जाता।
- अरुण पांडे, प्रांतीय प्रवक्ता, राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद