राज्य को केंद्र से मिले एक हेक्टेयर तक की वन भूमि हस्तांतरण का अधिकार नए साल से छिन रहा है। इस कारण वन भूमि हस्तांतरण की प्रक्रिया और जटिल हो जाएगी। इस कारण रामनगर में विकास की रफ्तार धीमी होने का खतरा है जबकि तमाम ग्रामीण मोटर कार्यों के निर्माण समेत वनाधिकारों के लिए संघर्षरत हैं।
इन विकास कार्यों के लिए बढ़ेगी परेशानी
- काशीपुर-बुआखाल एनएच 121 का चौड़ीकरण, पुल निर्माण
- लालढांग-कालागढ़-कोटद्वार कंडी मार्ग
- क्यारी-पवलगढ़ मोटर मार्ग
- भंडारपानी-सीतावनी-पवलगढ़ मोटर मार्ग
- पाटकोट-रामपुर-कोटाबाग मोटर मार्ग
- मालधनचौड़ से पतरामपुर मोटर मार्ग
- ढेला-पटरानी-तुमड़िया डाम
- ढेला-फांटो-पतरामपुर मोटर मार्ग
- पूछड़ी से भगवाबंगर, कालूसिद्ध मंदिर मार्ग
- पाटकोट-बमनगांव से सानणा मोटर मार्ग पर
- अमोठा से रियाड़ मोटर मार्ग
- कोसी नदी पर भरतपुरी, कौशल्यापुरी का तटबंध
- वनग्रामों में स्कूल भवन, बिजली, पेयजल, शौचालय आदि योजनाएं