सात सूत्रीय मांगों पर कार्रवाई ना होने से नाराज लैब टेक्नीशियन ने तीन अक्तूबर से दो घंटे के कार्य बहिष्कार की चेतावनी दी है। उन्होंने डीजी कार्यालय पर जानबूझकर मामला लटकाने का आरोप लगाते हुए स्वास्थ्य मंत्री से कार्रवाई की मांग की।
बृहस्पतिवार को लैब टेक्नीशियन एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष राकेश रावत के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने स्वास्थ्य मंत्री सुरेंद्र सिंह नेगी से मुलाकात की। राकेश रावत ने कहा कि कैडर पुनर्गठन समेत अन्य मांगों को लेकर लैब टेक्नीशियन दो अक्तूबर तक काली पट्टी बांधकर विरोध दर्ज करेंगे। इसके बाद तीन से नौ अक्तूबर तक सरकारी लैबों में दो घंटे कार्य बहिष्कार किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि डीजी कार्यालय छह माह से उनकी फाइल को दबाए बैठा है। फाइल शासन को भेजे जाने तक आंदोलन जारी रहेगा। जिन छह पदों पर डीपीसी के निर्देश हुए, उन पर भी कार्रवाई नहीं हुई है। वहीं स्वास्थ्य मंत्री ने उनकी सभी मांगों पर शीघ्र कार्रवाई का आश्वासन दिया।
लैब टेक्नीशियन की प्रमुख मांग
-लैब टेक्नीशियन संवर्ग के कैडर पुनर्गठन की फाइल शासन को भेजी जाए।
-लैब टेक्नीशियन का चयन विभागीय स्तर पर किया जाए।
-राष्ट्रीय नसबंदी शिविर में अन्य कर्मियों की भांति प्रोत्साहन राशि मिले।
-सेवा नियमावली में संशोधन कर पदनाम लैब टेक्नोलॉजिस्ट किया जाए।
-धुलाई भत्ता, पौष्टिक आहार भत्ता, वाहन व जोखिम भत्ता दिया जाए।
-लैब टेक्नीशियन के अनुमोदन पर खरीदी जाए लैब की सामग्री।
-वरिष्ठ लैब टेक्नीशियन के छह रिक्त पद जल्द भरे जाएं।
डेंगू व अन्य जांचें होंगी प्रभावित
इन दिनों मरीजों की भीड़ के चलते डेंगू व अन्य जांचों की रिपोर्ट मिलने में एक से दो दिन का समय लग रहा है। ऐसे में अगर इस वक्त टेक्नीशियन कार्य बहिष्कार करेंगे तो सैपंलिंग और उसकी जांच में दिक्कत होगी। जिसके कारण मरीजों को सैंपल देने और रिपोर्ट के लिए ज्यादा इंतजार करना पड़ेगा। वहीं कम लोगों की ही जांच हो पाएगी।