शोध के दौरान सुष्मिता ने द्वाराहाट-रानीखेत और नाजिया ने बागेश्वर-सोमेश्वर के पास के क्षेत्रों का अध्ययन किया। बताया जाता है कि उक्त क्षेत्रों में भूगर्भीय हलचलों को आंकने के लिए शोध नहीं हुआ है। दोनों छात्राओं ने शोध कार्य से निकले प्राथमिक परिणामों में पाया गया है कि उक्त पहाड़ी क्षेत्रों में आई दरारें काफी सक्रिय रूप में हैं।
यदि भूकंप का केंद्र कुछ दूरी पर भी होता है तो ये सक्रिय दरारें विकराल रूप ले सकती हैं। उन्होंने अपने शोध के प्राथमिक परिणामों में सरकार को चेताने का भी प्रयास किया है कि यदि उक्त क्षेत्र के आसपास भूगर्भीय हलचलें तीव्र हुई तो आपदा तबाही मचा सकती है। छात्राओं में शोध कार्य को जारी रखा है, लेकिन दरारों के सक्रिय होने के कारण भविष्य की चिंताओं को देखते हुए सरकार को उच्चस्तरीय शोध कराने की जरूरत है।