मेडिकल कॉलेज के स्त्री रोग एवं प्रसूति विभाग में विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी पहले से बनी हुई है। यहां जो डॉक्टर हैं, अकसर उनकी भी लापरवाही की शिकायत मिलती रहती हैं। इस बार मामला ज्यादा गंभीर है।
बताया जा रहा है कि 12 से 17 सितंबर के बीच यहां दो घटनाएं हुई हैं। जिनमें प्रसव के लिए सीनियर डॉक्टर के न आने की वजह से प्रसूता के गर्भ में ही शिशु की मौत हो गई।
दोनों ही मामलों में प्रशिक्षु और जूनियर डॉक्टरों के भरोसे प्रसूताओं को छोड़ दिया। उनके परिजनों ने सिजेरियन कराने की मिन्नतें की। लेकिन सीनियर डॉक्टर के न आने से यह संभव नहीं हुआ। मजबूरन सामान्य प्रसव करवाए गए लेकिन नवजातों में जान नहीं थी।
पहला मामला 12 सितंबर का है। श्रीनगर के डांग मुहल्ले की प्रसूता की स्थिति को देखते हुए संयुक्त अस्पताल से मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया। लेकिन वहां कई बार बुलाने के बावजूद ऑन कॉल सीनियर डॉक्टर नहीं आई। इस मामले में परिजनों ने कोतवाली और अस्पताल प्रबंधन को लिखित शिकायत दी है।
जबकि दूसरे मामले में लिखित शिकायत दर्ज नहीं हुई है। लेकिन सोशल मीडिया में यह मामला वायरल हो रहा है। जिसमें संबंधित डॉक्टर की काफी आलोचना हो रही है। सोशल मीडिया की पोस्ट के अनुसार, 17 सितंबर को पौड़ी से रेफर होकर यहां प्रसूता को लाया गया। लेकिन समय पर सीनियर डॉक्टर नहीं आया।
18 की सुबह डॉक्टर आए, लेकिन वह ऑपरेशन करने के बजाय एक निजी पैथोलॉली सेंटर में चले गए। अपराह्न 3.40 बजे जब गर्भस्थ शिशु की धड़कन बंद हुई, तो परिजनों ने अल्ट्रासाउंड कराया। तब तक बहुत देर हो चुकी थी। अस्पताल के सूत्रों ने भी इसकी पुष्टि की है कि वार्ड में इस तरह का मामला आया था।
12 सितंबर की ऑन कॉल ड्यूटी डॉक्टर इस घटना के बाद से अवकाश में चली गई है। लोगों की आम शिकायत है कि अस्पताल में प्रसव प्रशिक्षु डॉक्टर करते हैं, जिनको इतना ज्ञान नहीं है। ऐसे में जच्चा-बच्चा दोनों की जान को खतरा बना रहता है।
एक मामले में लिखित शिकायत मिली थी। संबंधित डॉक्टर अवकाश पर हैं। प्राचार्य से अनुरोध किया गया है कि जांच कमेटी गठित की जाए। दूसरे मामले में यदि लिखित शिकायत मिलती है, तो कार्रवाई की जाएगी। विभाग को नोटिस जारी किया गया है कि किसी भी दशा में इमरजेंसी केस लेने से मना न किया जाए।
- प्रो. केपी सिंह, एमएस बेस अस्पताल श्रीनगर