देहरादून के डोईवाला के जंगल में लाइसेंसी बंदूक से गुलदार मारने के दो आरोपियों को अदालत ने साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया। मामला जनवरी वर्ष 2009 का डोईवाला थाना क्षेत्र का है।
अभियोजन की ओर से आरोप लगाया गया कि शंभू सिंह व मोहन सिंह निवासी झबरावाला (डोईवाला) ने झबरावाला से लगे जंगल में लाइसेंसी बंदूक से गुलदार को मारा। गश्त कर रहे वनकर्मी ने गोली की आवाज सुनी तो वनकर्मी मौके पर पहुंचा। उसने देखा कि घटनास्थल से शंभू सिंह व मोहन सिंह भाग रहे हैं।
गवाह और पोस्टमार्टम रिपोर्ट में अंतर
वन विभाग की टीम ने आरोपियों को घटना के दूसरे दिन गिरफ्तार कर लिया था। दोनों के पास से 12 कारतूस व 12 बोर की डबल बैरल बंदूक बरामद की गई। एडीजे चतुर्थ विजेंद्र सिंह की अदालत में हुई सुनवाई में आरोप को साबित करने के लिए अभियोजन ने चार गवाह पेश किए।
बचाव पक्ष के अधिवक्ता मनोज यादव ने कहा कि वन विभाग की ओर से लगाए गए आरोप झूठे हैं। गवाहों ने कहा कि घटना के समय एक गोली चली, जबकि गुलदार की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में दो गोली लगना बताया गया। बचाव पक्ष के अधिवक्ता ने बताया कि अदालत ने प्रकरण को संदिग्ध मानते हुए दोनों आरोपियों को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया है।