देहरादून। विशेष पोक्सो अदालत ने नाबालिग लड़की से छेड़छाड़ और यौन उत्पीड़न के मामले में मुख्य आरोपी अंशुल यादव और अर्चना मेहरा को सभी आरोपों से दोषमुक्त कर दिया है। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश मंजू सिंह मुंडे की अदालत ने साक्ष्यों के अभाव और बयानों में विरोधाभास के चलते यह फैसला सुनाया।
मामला देहरादून के थाना कैंट क्षेत्र का है, जहां जुलाई 2023 में एक नाबालिग लड़की की तहरीर पर प्राथमिकी दर्ज की गई थी। पीड़िता ने आरोप लगाया था कि उसकी मां का दोस्त अंशुल यादव उसे ट्यूशन पढ़ाने के बहाने गलत तरीके से छूता था और अश्लील हरकतें करता था। उसने अपनी मां अर्चना मेहरा पर भी आरोप लगाया था कि जानकारी होने के बावजूद उन्होंने पुलिस को सूचित नहीं किया और आरोपी का साथ दिया।
पुलिस ने अंशुल के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया था। अदालत ने पाया कि पीड़िता के मजिस्ट्रेट के सामने दिए गए बयान और कोर्ट में दी गई मुख्य परीक्षा के बयानों में भारी अंतर था। पीड़िता ने कहा था कि आरोपी उसे घर पर गणित और विज्ञान पढ़ाता था, लेकिन अभियोजन पक्ष कोर्ट में ऐसी कोई नोटबुक या दस्तावेजी सबूत पेश नहीं कर सका जिससे ट्यूशन पढ़ाने की पुष्टि हो सके। कोर्ट के सामने यह बात भी आई कि पीड़िता कभी अपनी नानी के प्रभाव में आकर बयान दे रही थी, तो कभी अपनी मां के प्रभाव में।
इस कारण कोर्ट ने उसके बयानों को पूरी तरह विश्वसनीय नहीं माना। न्यायालय ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि अभियोजन पक्ष आरोपियों के खिलाफ लगे आरोपों को संदेह से परे साबित करने में पूरी तरह असफल रहा है। इसके चलते अदालत ने मुख्य आरोपी अंशुल यादव और सह-आरोपी अर्चना मेहरा को दोषमुक्त करते हुए उनके जमानत बंधपत्र निरस्त करने के आदेश दिया।