उत्तरकाशी जिले में भिलंगना नदी का जल स्तर बढ़ने और अत्यधिक गाद आने से तिलोथ और धरासू जल विद्युत गृह पर खतरा बढ़ गया। टरबाइनों को सिल्ट से बचाने के लिए दोनों विद्युत गृहों की मशीनों को थामना पड़ा।
देर शाम स्थिति कुछ सामान्य होने पर धरासू विद्युत गृह में तीन मशीनों से बिजली उत्पादन शुरू किया गया। वहीं, कुछ अन्य विद्युत गृहों में भी बीच-बीच में उत्पादन रोकना पड़ रहा है।
सिल्ट से कटने लगी रबर सील
मंगलवार रात करीब साढ़े तीन बजे भिलंगना नदी में जल स्तर बढ़ने के साथ कूड़ा करकट, गाद (सिल्ट) की मात्रा बढ़ गई। जिससे उत्तराखंड जल विद्युत निगम लिमिटेड (यूजेवीएनएल) के 90 मेगावाट के मनेरी भाली-प्रथम (तिलोथ) जल विद्युत गृह की मशीनों की रबर सील कटने लगी।
स्थिति को भांपते हुए यूजेवीएनएल अधिकारियों ने टरबाइनों का संचालन बंद कर दिया। इस विद्युत गृह में मशीनों के मरम्मत की जरूरत पड़ रही है। इसके चलते 11 जुलाई तक विद्युत उत्पादन नहीं हो पाएगा। इसी तरह, 300 मेगावाट विद्युत क्षमता के मनेरी भाली-द्वितीय (धरासू) विद्युत गृह में सिल्ट बढ़ने के कारण दोपहर करीब दो बजे विद्युत उत्पादन रोकना पड़ा।
देर शाम चली तीनों मशीनें
धरासू विद्युत गृह में शाम लगभग साढ़े पांच बजे तीन मशीनें चला दी गई। जबकि देर शाम तक एक मशीन बंद थी और विद्युत गृह से 200 मेगावाट बिजली मिल रही थी।
यूजेवीएनएल के डाइरेक्टर (आपरेशन) बीसीके मिश्रा ने बताया कि भिलंगना नदी में आई अत्यधिक सिल्ट से मशीनों को बचाने के लिए विद्युत गृहों में उत्पादन रोकना पड़ा। वहीं, पावर कॉरपोरेशन के डाइरेक्टर (एचआर) एवं प्रवक्ता पीसी ध्यानी ने बताया कि बृहस्पतिवार के लिए खुले बाजार से 67.80 लाख यूनिट अतिरिक्त बिजली खरीद ली गई है।