तृतीय केदार भगवान तुंगनाथ मंदिर के कपाट शीतकाल के छह माह के लिए 31 अक्तूबर को बंद होंगे। दो नवंबर को बाबा की उत्सव डोली शीतकालीन गद्दीस्थल तुंगनाथ मंदिर मक्कूमठ पहुंचेगी, जहां शीतकाल के छह माह बाबा की पूजा-अर्चना की जाएगी।
सोमवार को तुंगनाथ भगवान के शीतकालीन गद्दीस्थल मक्कूमठ में हकहकूकधारी, मठापति और वेदपाठियों की उपस्थिति में कपाट बंद करने की तिथि तय की गई।
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शीतकाल के लिए बंद किए जाएंगे
पंचांग गणना के अनुसार 31 अक्तूबर को दस बजे धनु लग्न में बाबा तुंगनाथ मंदिर के कपाट आम श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ शीतकाल के लिए बंद किए जाएंगे। इसी दिन बाबा की डोली अपने धाम से प्रस्थान कर रात्रि विश्राम के लिए चोपता पहुंचेगी।
एक नवंबर को चोपता से प्रस्थान कर रात्रि विश्राम के लिए डोली भनकुंड पहुंचेगी। दो नवंबर को भनकुंड से प्रस्थान कर डोली अपराह्न दो बजे शीतकालीन गद्दीस्थल मक्कूमठ पहुंचेगी और चित्रा नक्षत्र में मंदिर में प्रवेश करेगी।
इस मौके पर प्रबंधक प्रकाश पुरोहित, मठापति रामप्रसाद मैठाणी, माहेश्वर प्रसाद मैठाणी, विष्णुदत्त मैठाणी, वीर सिंह रावत, मुकेश मैठाणी और योगेश्वर मैठाणी समेत कई लोग उपस्थित थे।