पिथौरागढ़ स्थित नामिक सबसे दूरी वाला मतदान केंद्र है।
- फोटो : AmarUjala
हाड़ कंपा देने वाली ठंड के बावजूद उत्तराखंड के 488 बूथ चुनाव आयोग की पोलिंग टीमों के पसीने छुटाएंगे। इन दुरूह पोलिंग बूथों पर मतदान कराने के लिए पोलिंग टीमें दो-तीन पहले ही रवाना कर दी जाएंगी। प्रदेश में 488 हिमपात प्रभावित पोलिंग बूथ है।
लोकतंत्र के पर्व माने जाने वाले चुनाव को कुशलतापूर्वक संपन्न कराने के लिए निर्वाचन आयोग ने कमर कस ली है। उसे चुनाव में धनबल, बाहुबल की सियासत पर ही नकेल नहीं कसनी है, बल्कि उत्त्तराखंड की जटिल भौगोलिक परिस्थितियों के बीच चुनाव संपन्न कराने हैं।
बर्फ से ढंके बूथों पर मतदान चुनौती
उत्तराखंड में फरवरी में भारी बर्फ पड़ती है।
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उसके सामने सबसे कठिन चुनौती वे बूथ हैं, जो मतदान के दिन बर्फ से ढके होंगे। बर्फीले मौसम में इन बूथों पर मतदान कराने में पसीने छूट जाएं तो हैरानी नहीं होनी चाहिए।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी राधा रतूड़ी के मुताबिक, पिथौरागढ़ की धारचूला विधानसभा के नामिक सर्वाधिक दूरी वाला पोलिंग बूथ है। पोलिंग टीम बिर्थी से 25 किमी पैदल चलकर नामिक राजकीय प्राथमिक विद्यालय में बने पोलिंग बूथ तक पहुंचेंगी।
10 हजार फीट पर सर्वाधिक ऊंचाई वाला बूथ
बर्फबारी के बीच मतदान कराना बेहद मुश्किल
इसी तरह से टिहरी जनपद के घनसाली का गंगी सर्वाधिक ऊंचाई वाला पोलिंग बूथ है। यह 10 हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित इस पोलिंग बूथ में करीब 200 वोटर हैं।
हिमपात के चलते ऊंचाई वाले इलाकों से निचले स्थानों पर उतरने वाले करीब 3000 मतदाताओं के लिए 17 पोलिंग बूथ बनाए गए हैं। इनमें नौ पिथौरागढ़ व आठ चमोली जनपद में हैं।
स्नो बाउंड बूथों का ब्योरा
उत्तरकाशी- 102,
चमोली-70,
रूद्रप्रयाग-26,
टिहरी-23,
देहरादून-50,
पौड़ी-43,
पिथौरागढ़-18,
बागेश्वर-10,
अल्मोड़ा-16,
चमोली-11,
नैनीताल-72