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पढ़िए, राहुल गांधी के उत्तराखंड में होने का पूरा सच

Wed, 25 Feb 2015 10:27 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
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राहुल गांधी के उत्तराखंड में होने की खबर सुर्खियों में आने के बाद उत्तरकाशी दिन भर नेशनल मीडिया की सुर्खियों में रहा। बुधवार सुबह से ही चर्चा शुरू हो गई कि राहुल गांधी छुट्टियां बिताने उत्तरकाशी पहुंचे हैं।
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कुछ चैनलों पर उनके दयारा एवं बार्सू के पास कैंप करने से संबंधित फोटोग्राफ तक चले। राहुल के बारे में उत्तरकाशी प्रशासन से पूछताछ होती रही।

जिला प्रशासन ने बेशक राहुल के आगमन से इनकार किया हो लेकिन सियासी छुट्टी के बाद एकाएक विवादों में राहुल के उत्तरकाशी आने की चर्चा ने जिले को चर्चा में ला दिया है।

दरअसल राहुल 20 अक्तूबर 2009 को राहुल साथियों के साथ दियारा बुग्याल की ट्रैकिंग के लिए पहुंचे थे। यही नहीं, उत्तरकाशी में बंदरपूंछ और द्रोपदी का डांडा (चोटी) के दर्शन का आकर्षण भी मन में था।
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इस वक्त राहुल का आना हैरानी की बात नहीं

उस वक्त राहुल कांग्रेस के महासचिव थे। उस वक्त पर्वत शिखरों ने हरीतिमा की चादर ओढ़ रखी थी। इस समय बर्फ से ढका दयारा बुग्याल साहसिक खेलों को आमंत्रण दे रही है। बर्फ का यही सफेद रंग अध्यात्म और मन के सुकून के प्रतीक को भी खुद में धारण किए हुए है।

कुल चार दिन के प्रवास में राहुल ने दयारा बुग्याल में बकरा टॉप तक ट्रैकिंग भी की थी। ऐसे में इस समय दिल्ली के झंझावात से निजात पाने के लिए राहुल इस समय भी उत्तरकाशी की ओर रुख करें तो हैरान होने वाली बात नहीं है।

फिर एडवेंचर स्पोर्ट्स में रुचि रखने वाले राहुल के लिए इस समय उत्तरकाशी कई मायनों में आकर्षण का केंद्र साबित हो सकता है।

दयारा बुग्याल के अलावा भी उत्तरकाशी में कई ऐसे खूबसूरत स्थान हैं जहां देवदार के पेड़ों से छन कर चांदनी आती है। मिनी स्विटजरलैंड के खिताब से नवाजा गया हर्षिल भी इस समय बर्फ से लकदक है।
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बर्फबारी का लुत्फ उठाने के लिए है सबसे मुफीद

उत्तरकाशी में नेहरू पर्वतारोहण संस्थान से जुडे़ आमोद पंवार के मुताबिक बर्फबारी का लुत्फ उठाने के लिए हर्षिल इस समय सबसे मुफीद जगह है। वैसे भी प्रदेश सरकार विंटर टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए शीतकालीन चार धाम यात्रा शुरू कर चुकी है। अध्यात्म से दो चार होने का मन हो तो गंगोत्री और यमुनोत्री का पूरा क्षेत्र मौजूद है।

साहसिक खेलों में पर्वतारोहण के लिए यह माकूल समय है। उत्तराखंड में उत्तरकाशी ही एक ऐसी जगह है जिसकी एक साथ कई चोटियां इसके लिए आमंत्रित करती हैं। तपोवन से भागीरथी- एक, दो और तीन, मेरु पर्वत, शिवलिंग आदि चोटियां हैं जिनको मापते हुए बर्फ पर चहलकदमी का आनंद लिया जा सकता है।

इससे अलग हटकर हर की दून है जिसे मिनी वैली ऑफ फ्लावर के रूप में जाना जाता है। उत्तरकाशी में नेहरू पर्वतारोहण संस्थान भी है जो कई स्थानों पर स्कीइंग का प्रशिक्षण भी दे रहा है।
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