ऋषिकेश। पुलिस ने खाली कराए घाटए जलपुलिस बचाव ने किए बचाव के इंतजाम
ऋषिकेश। पहाड़ों पर लगातार जारी बारिश के बाद गंगा उफन आई। त्रिवेणी घाट पर आरती स्थलए सेल्फी प्वाइंटए चेंजिंग रूम पानी में डूब गए। अचानक बड़े जलस्तर से हैरान पुलिस ने घाट को खाली करा दिया।
योगनगरी में गंगा ने शुक्रवार को रौद्र रूप धारण कर लिया। त्रिवेणी घाट, परमार्थ निकेतन घाट, सांई घाट, नाव घाट समेत सभी प्रमुख घाट जलमग्न हो गए। गंगा का वेग इतना जबरदस्त था कि त्रिवेणी घाट पर चेंजिंग रूम और कूड़ेदान बह गए। घाटों के आसपास सो भिक्षुओं में भी अफरा-तफरी मच गई। ये देख त्रिवेणी घाट चौकी पुलिस के होश उड़ गए। चौकी प्रभारी उत्तम रमोला ने घाट को खाली करना शुरू करा दिया। कुछ देर में प्रशासन की टीम मौके पर पहुंच गई। इसके साथ जल पुलिस ने भी नौका पानी उतार कर बचाव कार्यों की तैयारी शुरू कर दी।
रात भर नहीं सोए लोग
प्रशासन ने गंगा के आसपास के क्षेत्रों मुनादी शुरू करा दी थी। कई लोग गांव और बस्तियों की छोड़कर सुरक्षित स्थानों की ओर निकल गए। लेकिन कुछ लोग घर पर भी रुके थे। इन लोगों की दहशत के चलते रातभर नींद नहीं आई।
धर्मशालाओं को जारी किए दिशा निर्देश।
तहसील प्रशासन ने संभावित बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों की खाली करना शुरू कर दिया। इसके लिए धर्मशालाओं और होटल संचालकों को दिशा निर्देश भी जारी किए गए।
कंट्रोल रूम और बाढ़ चौकियां अलर्ट
एसडीएम मनीष कुमार ने कंट्रोल रूम और बाढ़ चौकियों को 24 घंटे पूरी तरह अलर्ट मोड पर रहने के निर्देश दिए हैं। गंगा के आसपास के क्षेत्रों में प्रशासन की टीम को तैनात किया गया है। सभी अधिकारियों और कर्मचारियों की अलर्ट रहने के लिए कहा गया है।
अधूरी तैयारी प्रशासन की पड़ सकती थी बारी
बाढ़ आती तो मच सकती थी तबाही
जितेंद्र जोशी
ऋषिकेश। एसडीएम के निर्देश के बाद भी सिंचाई विभाग ने संभावित बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा कार्य शुरू नहीं किये। विभाग एक बार फिर सुरक्षा कार्यों का एस्टीमेट बनाने तक सीमित रहा। ऐसे में अगर बाढ़ आती तो अधूरे इंतजामों से बड़ी तबाही मच सकती थी।
योगनगरी में अचानक बढ़े गंगा के जलस्तर से प्रशासन की तैयारी पर फिर सवाल उठ रहे हैं। प्री मानसून में की बारिश में ही गंगा उफनने लगी। लेकिन संभावित बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में तटबंध और वायरक्त्रस्ेट बनाने का काम भी शुरू नहीं हुआ। अभी सिंचाई विभाग की टीम हर बार की तरह बाढ़ सुरक्षा कार्यों के लिए क्षेत्रों का मौका मुआयना कर एस्टीमेट बनाने में जुटी है। ऐसे में अगर अगर गंगा का जलस्तर खतरे का निशान पार कर जाता तो आसपास के क्षेत्रों में बाढ़ का आना तय था। ऐसे में बाढ़ कहर ढा सकती थी।