इस तरह वे राज्य गठन के बाद अंतरिम सरकार और 2002 से 2017 के दौरान निर्वाचित चार सरकारों में सदन पटल पर बजट पेश करने वाले चौथे और भाजपा सरकार के तीसरे मुख्यमंत्री होंगे।
उनसे पहले 2002 से 2007 के दौरान तत्कालीन मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी ने बजट पेश किया। उनके बाद 2007 से 2012 के दौरान तत्कालीन मुख्यमंत्री मेजर जनरल बीसी खंडूड़ी और डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक को बजट पेश करने का अवसर मिला।
पूर्व वित्त मंत्री प्रकाश पंत के देहावसान के बाद उनके सभी मंत्रालय मुख्यमंत्री ने अपने पास रखे। सत्र के दौरान केवल संसदीय कार्य मंत्रालय का दायित्व शहरी विकास मंत्री मदन कौशिक को सौंपा। बजट सत्र से पूर्व मुख्यमंत्री ने होमवर्क भी किया। उन्होंने बजट में जन भागीदारी सुनिश्चत करने को लेकर सोशल मीडिया पर जनता से सुझाव भी लिये। उनसे पहले पूर्व वित्त मंत्री पंत भी सोशल मीडिया पर जनता से सुझाव लेते थे।