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6 साल के लिए यूकेडी से निष्कासित त्रिवेंद्र सिंह पंवार

Mon, 28 Dec 2015 02:12 PM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, रुद्रपुर
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उत्तराखंड क्रांति दल की केंद्रीय कार्यकारिणी की बैठक में यूकेडी के पूर्व अध्यक्ष त्रिवेंद्र पंवार पर पार्टी विरोधी गतिविधियों में लिप्त रहने और नोटिस का जवाब नहीं देने पर 6 साल के लिए निष्कासित कर दिया गया है।
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साथ ही पार्टी का नाम प्रयोग करने पर कानूनी कार्रवाई की चेतावनी भी दी है। वहीं, पार्टी ने हर विधानसभा में सम्मेलन कर जनता को जोड़ने का निर्णय लिया है। रुद्रपुर में एक धर्मशाला में उत्तराखंड कार्यकारिणी की बैठक के बाद पत्रकारों को जानकारी देते हुए यूकेडी के केंद्रीय अध्यक्ष पुष्पेश त्रिपाठी ने बताया कि त्रिवेंद्र सिंह पंवार का कार्यकाल 2012 में पूर्ण हो गया था।

उसके बाद से वह पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल रहे। इसके लिए उन्हें एक माह पूर्व नोटिस दिया गया था। लेकिन पंवार ने आज तक कोई जवाब नहीं दिया। इसलिए पार्टी ने उन्हें 6 साल के लिए पार्टी से निष्कासित कर दिया गया है।
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उन्होंने कहा कि अगर पंवार ने दल के नाम का प्रयोग या दल के खिलाफ कोई बयानबाजी की तो उन पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। पुष्पेश त्रिपाठी ने कहा कि उत्तराखंड में जाति के आधार पर आरक्षण न होकर आरक्षण का आधार आर्थिक पिछड़ापन होना चाहिए।

काशी सिंह ऐरी ने केंद्रीय कार्यकारिणी में पास हुए प्रस्ताव के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि उत्तराखंड की स्थायी राजधानी गैरसैंण, आपदा घोटाले की जांच सीबीआई से कराने, 50 हजार की जनसंख्या में विकासखंड बनाने, लोकायुक्त बनाने, नए जिले बनाने, बिंदुखत्ता को राजस्व गांव बनाने सहित कई प्रस्ताव पारित किए गए।

कार्यकारिणी में चाय बागानों को स्मार्ट सिटी के नाम पर बिल्डरों को सौंपने, नानीसार जमीन आदि पर प्रदेशव्यापी आंदोलन करने का भी निर्णय लिया गया। इस दौरान केंद्रीय संस्थापक डीडी मिश्रा, भुवन जोशी, नारायण जंतवाल, संतोष, ब्रिजवीर चौधरी, विरेंद्र कपकोटी, श्याम नारायण, पंकज सहित कई लोग मौजूद रहे।

त्रिवेंद्र पवार ने बताया हास्यास्पद
यूकेडी पी के केंद्रीय अध्यक्ष त्रिवेंद्र सिंह पवार ने उन्हें दल से बाहर निकालने के फैसले को हास्यास्पद करार दिया। उन्होंने कहा कि जो लोग उन्हें निकालने का दावा कर रहे हैं, उन्हें वह पार्टी से 2013 में ही निकाल चुके हैं।

ये लोग कांग्रेस की बी पार्टी के रूप में कार्य कर रहे हैं। अपना अस्तित्व बचाने के लिए ऐसी ओछी हरकतें कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी को चुनाव आयोग पहले ही मान्यता दे चुका है।
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