मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने दिव्यांगों को लेकर बड़ा ऐलान किया है। उनका कहना है कि दिव्यांगों को सार्वभौमिक (यूनिवर्सल) पहचान पत्र दिए जाएंगे, जो कि पूरे देश में मान्य होंगे। जिससे उन्हें कहीं भी आने जाने व सुविधाओं का लाभ लेने में आसानी होगी।
उन्होंने कहा है कि गांवों में शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार उपलब्ध कराने से ही पलायन रुकेगा। सरकार प्रदेश के 670 न्याय पंचायत मुख्यालयों में विकास केंद्र (ग्रोथ सेंटर) स्थापित करेगी।
इन केंद्रों में दो सौ लोगों को रोजगार मुहैया कराया जाएगा। प्रथम चरण में 50 केंद्र खोले जाएंगे। स्वास्थ्य सेवाएं बेहतर करने के लिए प्रत्येक जिले में दो आईसीयू सेंटर की स्थापना होगी। अल्मोड़ा में यह सेंटर तीन माह में काम करने लगेगा।
मुख्यमंत्री यहां एसएसजे परिसर के सिमकनी मैदान में राष्ट्रीय वयोश्री योजना के तहत एलिम्को की ओर से लगाए गए सहायक उपकरण वितरण शिविर को संबोधित कर रहे थे। इस मौके पर 513 दिव्यांगों को 18.90 लाख के 1090 सहायक यंत्र और उपकरण वितरित किए गए।
सीएम ने कहा कि देश की रक्षा में वीरगति प्राप्त सैनिकों के परिजन को राजकीय सेवा देने वाला उत्तराखंड देश का पहला राज्य होगा। रावत ने बाद में पत्रकारों से बातचीत में कहा कि ग्रामीण इलाकों को पालिका क्षेत्र में जबरदस्ती शामिल नहीं किया जाएगा, लेकिन विरोध कर रहे लोगों से विकास के दृष्टिगत इस पर पुनर्विचार करना चाहिए। उन्होंने पंचेश्वर बांध को जरूरी बताए हुए प्रभावितों की समुचित व्यवस्था करने का भरोसा भी दिलाया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए केंद्रीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्री थावर चंद गहलोत ने कहा कि प्रदेश सरकार प्रत्येक जिले में वृद्ध जन गृह (डे-केयर सेंटर) खोलने के लिए प्रस्ताव भेजे, भारत सरकार इसमें पूरी सहायता करेगी।
उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय वयोश्री योजना के तहत यह देश का नौवां और उत्तराखंड का पहला शिविर है। कहा कि दिव्यांगों को सार्वभौमिक (यूनिवर्सल) पहचान पत्र दिए जाएंगे, जो कि पूरे देश में मान्य होंगे। इस मौके पर विशिष्ट अतिथि केंद्रीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता राज्य मंत्री कृष्णपाल गुर्जर, केंद्रीय कपड़ा राज्य मंत्री अजय टम्टा, प्रदेश की बाल विकास मंत्री रेखा आर्या, विधानसभा उपाध्यक्ष रघुनाथ सिंह चौहान ने भी विचार रखे।