उत्तराखंड स्थित धनोल्टी के आस-पास सड़कों पर बेशकिमती 'दौलत' (देवदार की लकड़ियां) लावारिस पड़ी हैं, लेकिन वन विभाग को इससे कोई सरोकार नहीं है।
देवदार और चीड़ के दर्जनों पेड़
जून माह में आई आपदा के दौरान कद्दूखाल, ज्वारना, काणाताल के जंगलों में भारी मात्रा में देवदार और चीड़ के दर्जनों पेड़ टूट गए थे। अब छह माह गुजरने के बाद भी इन पेड़ों को विभाग ने अपने कब्जे में नहीं लिया है।
जिस कारण सड़क में जगह-जगह पर दर्जनों की संख्या में लकड़ियां लावारिश हालत में पड़ी हुई है। वहीं तंग सड़क होने के कारण इनके चलते यातायात भी बाधित हो रहा है। इतना ही नहीं कई स्थानों में अभी भी क्षत्तिग्रस्त पेड़ पहाड़ी पर अटके हुए हैं।
जिन्हें अभी तक नहीं हटाया गया है। जो कभी भी दुर्घटना का सबब बन सकते हैं। ग्रामीण कई बार पहाड़ी पर अटके क्षत्तिग्रस्त पेड़ों को हटाने की मांग करते आ रहे हैं, लेकिन विभाग सुनने को तैयार नहीं है।
कोई नहीं सुधलेवा
क्षेत्र के आरएस डबराल, किशन सिंह रमोला का कहना है कि कई स्थानों पर क्षत्तिग्रस्त पेड़ बड़ी दुर्घटना को न्यौता दे सकते हैं। इन पेड़ों को हटाना तो दूर सड़कों पर पड़ी लकड़ियों की सुधलेवा ही कोई नहीं है।
क्षत्तिग्रस्त पेड़ों का कटान-छपान किया जा चुका है। वन निगम को पेड़ों को शीघ्र डिपो में भेजने को कहा गया था। निगम ने इस पर कार्रवाई शुरू कर दी है।
- एमएल राही, रेंजर सकलाना रेंज