प्राकृतिक आपदाओं और आए दिन सड़क हादसों में घायल होने वाले लोगों की जान बचाने के लिए बनाए गए ट्रॉमा सेंटर बिगड़े सिस्टम की आपदा का शिकार हो गए हैं। प्रदेश के जिलों में बनाए गए इन ट्रॉमा सेंटर में घायलों को सभी विशेषज्ञताओं की चिकित्सीय सुविधाएं उपलब्ध कराए जाने का लक्ष्य था, लेकिन इनमें स्वास्थ्य विभाग अभी तक पर्याप्त स्टाफ ही मुहैया नहीं करा पाया।
पर्वतीय जिलों में भूस्खलन समेत दूसरी प्राकृतिक आपदाओं की वजह जान-माल की हानि होती है। बहुत से लोग सिर्फ इलाज न मिलने की वजह से मर जाते हैं। इसके अलावा इन क्षेत्रों में आए दिन वाहन दुर्घटनाएं होती रहती हैं।
अगर ट्रॉमा सेंटर पूरी तरह सुसज्जित रहें तो बहुत से लोगों की जान बच जाए। इन ट्रॉमा सेंटरों का भी प्राथमिक और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों जैसा हाल हो गया है। केंद्र के वित्तीय सहयोग से बने 14 ट्रॉमा सेंटरों में न पर्याप्त उपकरण हैं न ही विशेषज्ञ चिकित्सक।
चारधाम यात्रा मार्ग हो या फिर पर्वतीय जनपदों के अन्य मार्ग आपदा एवं सड़क हादसों की स्थिति में घायलों को देहरादून और हल्द्वानी भेज दिया जाता है। इससे कई बार गंभीर रूप से घायल रास्ते में ही दम तोड़ देते हैं।
डाक्टरों के 1500 पद खाली
ट्रॉमा सेंटर के पीछे मंशा यह थी कि आपदा एवं दुर्घटना के दौरान घायलों व गंभीर बीमार को एक छत के नीचे सभी स्वास्थ्य सुविधाएं मिल सकें। इसके लिए केंद्र के सहयोग से गोपेश्वर, पिथौरागढ़, कोटद्वार, चंपावत, बागेश्वर, उत्तरकाशी, देहरादून और श्रीनगर में प्रति ट्रॉमा सेंटर 1.55 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए थे। केंद्र के सहयोग ने इन जनपद मुख्यालयों में ट्रॉमा सेंटर की स्थापना की गई, लेकिन इनमें न पर्याप्त उपकरण हैं न ही विशेषज्ञ चिकित्सक।
प्रदेश के अस्पतालों में डाक्टरों के 1500 पद खाली हैं। स्वीकृत 2700 पदों में से 55 फीसदी पदों के खाली होने से स्वास्थ्य सेवाएं बदहाल हैं।
स्वास्थ्य विभाग की ओर से चिकित्सा चयन आयोग को 712 डॉक्टरों के लिए अधियाचन किया गया है। संभावना जताई जा रही है कि आयोग से विभाग को शीघ्र ही डाक्टर मिल सकेंगे।
स्वास्थ्य महानिदेशक डा.डीएस रावत ने बताया कि अस्पतालों और ट्रॉमा सेंटरों में विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी है, इसे दूर किया जा सके इसके प्रयास किया जा रहा है, हर मंगलवार वाक इन इंटरव्यू के अलावा आयोग में अधियाचन किया गया है। इसके अलावा केंद्र के सहयोग से टिहरी, रुड़की, हल्द्वानी और देहरादून में ट्रॉमा सेंटर बनने प्रस्तावित हैं।