बजट पर मैराथन चर्चा के बाद गुरुवार को इसे सदन में पास कर दिया जाएगा। मगर पक्ष-विपक्ष की चर्चा से जुदा बजट से जुड़ी एक सच्चाई यह भी रही कि इतिहास में पहली बार पिछले वित्तीय वर्ष के सापेक्ष बजट का आकार घट गया।
यानी प्रदेश की सत्ता पर सरकार चाहे जिस दल की रही हो, किसी न किसी बहाने आमदनी और खर्च के आंकड़ों में बाजीगरी के मामले में कोई कम नहीं रहा। इस बार भाजपा सरकार ने यह करामात की है।
जिस रूप में बजट परोसा गया, उसे देखते हुए बजट का आकार 24 फीसद से अधिक बढ़ा है, मगर जब पिछले वर्ष के बजट आकार और सदन में पेश बजट अनुमानों की तुलना करते हैं, तो पिछले 17 सालों में पहली बार बजट का आकार कम नजर आता है।
पिछले वित्तीय वर्ष में प्रदेश सरकार ने 40422 करोड़ रुपये का अनुमानित बजट पास किया था, जिसके सापेक्ष उसका पुनरीक्षित व्यय करीब 32 हजार करोड़ रुपये का अनुमान है। इस बार प्रदेश सरकार ने पुनरीक्षित व्यय की तुलना में अपने बजट आकार को पेश किया। इससे उसका बजट आकार बढ़ गया। वरना अभी तक सरकारें पिछले वर्ष बजट आकार से अधिक राशि का ही बजट प्रस्तुत करती आई हैं और इसके बावजूद बजट आकार कम नहीं हुआ।
एक बार भी ऐसा नहीं हुआ
prakash pant
वित्तीय वर्ष- बजट आकार
2007-08- 11,128.23 करोड़
2008-09- 12,441.32 करोड़
2009-10- 14,737.38 करोड़
2010-11- 15,451.95 करोड़
2011-12- 19,366.91 करोड़
2012-13- 21,931.77 करोड़
2013-14- 25,329.84 करोड़
2014-15- 30,353,78 करोड़
2015-16- 32,693.64 करोड़
2016-17- 40,422.20 करोड़
2017-18- 39,856.13 करोड़
पिछले बजट में सातवें वेतन की राशि भी शामिल थी। चुनावी वर्ष होने की वजह से भी इसमें वित्तीय प्रावधान किए गए थे। केंद्र पोषित योजनाओं में भी राशि बढ़ाई गई थी। इस कारण पिछले वर्ष का बजट का आकार बढ़ा था। किंतु इस बजट में सभी विभागों से अनुदान मांगें पूरी की गई हैं और पुनरीक्षित व्यय के सापेक्ष इस वित्तीय वर्ष में बजट राशि 30 फीसदी अधिक है। राजस्व प्राप्ति के लिए भी महत्वाकांक्षी लक्ष्य तय किए गए हैं।
-अमित सिंह नेगी, सचिव वित्त
आज पास होगा बजट
विधानसभा पटल पर पेश बजट के समर्थन और विरोध में चर्चा के बाद बृहस्पतिवार को सरकार इसे पारित करेगी। ऐसा संभव है कि सरकार पक्ष और विपक्ष के सदस्यों द्वारा बजट के संबंध में दिए गए सुझावों को अंगीकार करे। बता दें कि सरकार ने आठ जून को सदन पटल पर बजट प्रस्तुत किया था।