कंपनी अगस्य बायंट के साइट इंजीनियर शुभम नेगी ने बताया कि इस उपकरण को गंगा नदी में उतारा जाएगा। इसे दो छोर से बांध दिया जाएगा। इस उपकरण का डेढ़ फीट हिस्सा गंगा नदी के नीचे रहेगा और आधा फीट हिस्सा नदी के ऊपर रहेगा। इस दौरान नदी का जल निचले हिस्से से होकर आगे प्रवाहित होगा और नदी में बहने वाली गंदगी इसके ऊपरी हिस्से में फंस जाएगी। इसके बाद इस गंदगी को निकाला जा सकेगा।
कितना कारगर है उपकरण
कंपनी के साइट इंजीनियर ने बताया कि ट्रैश बूम उपकरण पांच मीटर प्रति सेकेंड की रफ्तार से आने वाले नदी के जल को भी झेल सकता है। इस उपकरण की सहायता से नदी में बहने वाली गंदगी जैसे कपड़े, फूल, पत्तल, पूजन सामग्री, कीचड़ यहां तक की लकड़ी भी फंस जाएगी। इसके बाद इसे आसानी से हटाया जा सकेगा। उन्होंने बताया कि यह उपकरण को जब तक कोई हानि नहीं पहुंचाएगा, तब तक यह काम करेगा।
ईको फ्रेंडली है ट्रैश बूम उपकरण
ट्रैश बूम उपकरण के लिए कंपनी ने यूएसए से पीवीसी मैरिन ग्रेन कपड़ा मंगवाया है। इसके अंदर उच्च क्वालिटी का फॉम लगा हुआ है। गंगा में जलते दीये से इसे कोई नुकसान न पहुंचे और दीये भी इसमें फंस जाए, इसके लिए कंपनी ने इस उपकरण में ग्लास फाइबर का मैटिरियल लगाया है। साइट इंजीनियर के अनुसार यह उपकरण पूरी तरह से ईको फ्रेंडली है। इससे गंगा नदी को कुछ भी नुकसान नहीं पहुंचेगा।