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चार दिनों से धरने पर बैठी ट्रांसपोर्टर की पत्नी की हालत बिगड़ी

Tue, 20 Feb 2018 12:07 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हल्द्वानी
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prakash pandey wife and relatives - फोटो : file photo
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चार दिनों से धरने पर बैठी ट्रांसपोर्टर स्व. प्रकाश पांडे की पत्नी कमला पांडे की तबियत सोमवार को बिगड़ गई। आनन-फानन में बेस अस्पताल के चिकित्सक से कमला का स्वास्थ्य परीक्षण कराया गया।

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बीमार कमला को जांच के लिए सुशीला तिवारी अस्पताल ले जाने के सुझाव के बाद मौके पर पहुंचे सिटी मजिस्ट्रेट, तहसीलदार और कोतवाल को परिजनों और धरने पर बैठे लोगों ने खरीखोटी सुनाई। बीमार कमला ने पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों को यह कहते हुए बैरंग लौटा दिया कि जब तक डीएम मौके नहीं पहुंचेंगे तब तक वे अस्पताल नहीं जाएंगी। 

काठगोदाम निवासी ट्रांसपोर्टर प्रकाश पांडे के परिजन मुआवजे की शेष रकम देने, पत्नी को सरकारी नौकरी दिलाने और बच्चों की पढ़ाई का खर्च वहन करने संबंधी आश्वासन को पूरा कराने की मांग को लेकर बुद्ध पार्क में धरने पर बैठे हैं। सोमवार को धरने पर बैठने के कुछ देर बाद ही पत्नी कमला पांडे की तबियत बिगड़ गई। बहनोई उमेश मेलकानी व मनमोहन जोशी ने स्वास्थ्य परीक्षण के लिए निजी क्लीनिक से चिकित्सक को बुलाया। इस बीच खुफिया विभाग ने उक्त सूचना पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों को दी। सूचना मिलने पर तहसीलदार पीके आर्य और कोतवाल केआर पांडे मौके पर पहुंचे। प्रशासन ने बेस अस्पताल से डा. अमित रौतेला को स्वास्थ्य परीक्षण के लिए धरनास्थल पर भेजा। स्वास्थ्य परीक्षण में कमला का ब्लड प्रेशर कम निकला। डा. रौतेला ने अधिकारियों को सुझाव दिया कि वह सुशीला तिवारी अस्पताल ले जाकर वहां कमला की जांच कराएं। 
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सुझाव के बाद सिटी मजिस्ट्रेट पंकज कुमार उपाध्याय अन्य अधिकारियों के साथ एंबुलेंस के साथ धरनास्थल पर पहुंचे। एसटीएच भेजने की बात कहने पर परिजन व अन्य लोग भड़क उठे। मंडी समिति अध्यक्ष सुमित हृदयेश समेत अन्य लोगों का कहना था कि वह चार दिन से धरने पर बैठे हैं लेकिन आज तक उनकी सुध नहीं ली गई। अब सरकार और प्रशासन ट्रांसपोर्टर की पत्नी को जबरन अस्पताल ले जाने के बहाने धरने को खत्म करना चाहती है। सिटी मजिस्ट्रेट उपाध्याय ने परिजनों व अन्य लोगों को समझाने का प्रयास किया लेकिन परिजन और स्वयं कमला एसटीएच जाने को तैयार नहीं हुईं। लोगों की सिटी मजिस्ट्रेट से तीखी बहस हुई। कमला समेत अन्य परिजनों ने डीएम को बुलाने की मांग की। घंटों की मशक्कत के बाद आखिरकार पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों को धरना स्थल से बैरंग लौटना पड़ा। 

मां बोली, सरकार से अपना ही पैसा मांगा था
स्व. ट्रांसपोर्टर प्रकाश पांडे की मां देवकी पांडे का रो-रोकर बुरा हाल है। बुजुर्ग देवकी दिन भर बेटे की याद में आंसू बहाकर सरकार और जिला प्रशासन को कोसती रही। उन्होंने कहा कि प्रकाश पिछले सात आठ माह से सरकार से अपना ही पैसा मांग रहा था। उसने मुख्यमंत्री से लेकर प्रधानमंत्री तक को पत्र लिखा लेकिन कुछ नहीं हुआ। 

सहकारिता मंत्री ने भी पल्ला झाड़ा
ट्रांसपोर्टर प्रकाश पांडे के परिजनों को मुआवजा देने के मामले में सहकारिता मंत्री डा. धन सिंह रावत भी पल्ला झाड़ गए। यहां एक कार्यक्रम में हिस्सा लेने पहुंचे डा. रावत से जब पत्रकारों ने इस संबंध में सवाल किया तो उन्होंने यह कहते हुए पल्ला झाड़ लिया कि सरकार आम आदमी की भलाई के लिए काम कर रही है। 

धरने को समर्थन देने पहुंचे यह लोग
हल्द्वानी। पांडे परिवार की मांग को जायज बताते हुए सोमवार को मंडी सभापति सुमित हृदयेश समेत टीम अन्ना के प्रदेश कार्यसमिति सदस्य सुशील भट्ट, ट्रांसपोर्टर व्यापारी संघ के अध्यक्ष अमरजीत सिंह सेठी, महामंत्री प्रदीप सब्बरवाल, इंद्र कुमार भूटियानी, राजेश पुरी, शंकर भूटियानी, खीमानंद शर्मा, हाजी नफीस अहमद, तारा ठाकुर, उक्रांद नेता भुवन जोशी, एनडी तिवारी, केडी पांडे, मदन मोहन जोशी, हेमंत साहू, राजू रावत, आलू फल आढ़ती व्यापारी एसोसिएशन के अध्यक्ष जीवन सिंह कार्की, कैलाश चंद्र जोशी, केशवदत्त पलड़िया, सज्जाद अली, चरणजीत सिंह ब्रिंदा, जगदीश सिंह पडियार, योगेश कांडपाल, उमेश चंद्र बेलवाल व उपपा के केंद्रीय महामंत्री प्रभात ध्यानी आदि ने धरना स्थल पर पहुंचकर आंदोलन को समर्थन दिया।

बिगड़ा स्वास्थ्य खराब कर सकता है सरकार-प्रशासन की सेहत
ट्रांसपोर्टर प्रकाश पांडे के परिजनों द्वारा शुरू किया गया धरना स्थानीय पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों की गले की फांस बन गया है। ऐसा इसलिए क्योंकि चिकित्सक ने पत्नी कमला पांडे की जांच सुशीला तिवारी अस्पताल में कराने का सुझाव दिया है और कमला पांडे अस्पताल जाने को तैयार नहीं हैं। यदि ऐसे में कमला का स्वास्थ्य अधिक बिगड़ता है तो स्थितियां एक बार फिर सरकार और प्रशासन के खिलाफ हो सकती हैं।

सोमवार को पहुंचे पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों को उम्मीद थी कि धरने पर बैठे लोग कमला को अस्पताल ले जाने के लिए आसानी से तैयार हो जाएंगे। इसी उम्मीद के साथ प्रशासनिक अधिकारी एंबुलेंस लेकर मौके पर पहुंचे थे। अधिकारियों ने आश्वस्त किया कि वह जांच के बाद वापस उन्हें धरनास्थल पर छोड़ देंगे लेकिन अधिकारियों से इस आश्वासन पर किसी को विश्वास नहीं हुआ। यही कारण है कि अधिकारियों को खरीखोटी सुननी पड़ी। लोगों का कहना था कि एक आश्वासन उन्हें पहले डीएम ने दिया था, जिसे पूरा कराने के लिए परिजनों को धरने पर बैठना पड़ रहा है। अब दूसरा आश्वासन प्रशासन के स्थानीय अधिकारी दे रहे हैं। लोगों को आशंका है कि इलाज के नाम पर ट्रांसपोर्टर की पत्नी को अस्पताल ले जाने के बहाने प्रशासन कहीं इस धरने को न खत्म कर दे।

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