12 प्रयास विफल होने के बाद आखिरकार 20 दिसंबर को उत्तराखंड-उत्तर प्रदेश के बीच परिवहन करार हो गया। अब उत्तराखंड की बसें उत्तर प्रदेश की सीमा में प्रतिदिन दो लाख 40 हजार किलोमीटर चलेंगी।
विज्ञापन
वहीं, यूपी की बसें उत्तराखंड की सीमा पर प्रतिदिन एक लाख 12 हजार किलोमीटर चलेंगी। साथ ही यात्रियों की सहूलियत के लिए यूपी-उत्तराखंड दोनों जगह दोनों राज्यों के बसों का टाइम टेबल उपलब्ध रहेगा।
उत्तराखंड परिवहन निगम का 1100 बसों का बेड़ा संचालित होता है। लंबे समय से यूपी के बीच परिवहन करार लटका हुआ था, जिस कारण बसें सीज करने समेत कई तरह की दिक्कतें आती थीं।
विज्ञापन
परिवहन करार के लिए राज्य सरकार ने 12 बार कोशिश की लेकिन, हर बार किसी न किसी कारण से मामला लटक गया। इस बार दोनों राज्यों में भाजपा सरकार होने के कारण करार में आने वाली दिक्कतें सुलझा ली गईं।
इनसे समझौता होना बाकी
अभी उत्तराखंड का हरियाणा, चंडीगढ़, हिमाचल, राजस्थान, जम्मू-कश्मीर से लेकर दिल्ली से भी समझौता होना बाकी है। इसमें से अधिकतर जगहों पर भाजपा और समर्थित सरकारें है, इससे ये समझौता होने की प्रबल संभावनाएं हैं।
परिवहन मंत्री यशपाल आर्य के अनुसार यूपी के साथ समझौता होना एतिहासिक है। इसका सीधा लाभ यात्रियों को मिलेगा। साथ ही अभी तक दोनों राज्यों की बसें टैक्स नहीं देती थी, अब राजस्व मिलेगा।
अभी तक एक-दूसरे की बसों को सीज करने की जो कार्रवाई होती थी, वह भी बंद होगी। उन्होंने बताया कि अन्य राज्यों से भी करार की कोशिशें तेज कर दी गई हैं। इधर, यूपी के साथ परिवहन करार होने पर परिवहन निगम की यूनियनों ने खुशी जताई है।