देहरादून के किन्नरों को सरकारी इमदाद की जरूरत नहीं है। इसका प्रमाण है समाज कल्याण विभाग की ओर से दी जाने वाली पेंशन योजना में विगत एक साल में एक भी आवेदन का न आना।
पेंशन लेने में दिलचस्पी न लेना दर्शाता है यह समुदाय पहले से ही काफी संपन्न हैं। हालांकि विभाग की ओर से कई बार समुदाय के जनप्रतिनिधियों के साथ बैठक की, लेकिन उन्होंने पेंशन लेने से इंकार कर दिया।
जरूरतमंद लोगों के लिए बजट का रोना रोने वाले समाज कल्याण ने ऐसे समुदाय के लिए पेंशन की शुरूआत की, जो स्वयं ही पेंशन नहीं चाहता। 40 से 60 साल की उम्र के मध्य के किन्नरों को एक हजार मासिक पेंशन को एक साल में एक भी आवेदन नहीं आया।
जानकार बताते है कि किन्नर भले ही शुभ कार्यों में लोगों के घरों में मांग कर अपना गुजारा पसंद करते है, लेकिन सरकार की ओर से दी जाने वाली इस इमदाद का वे स्वीकार नहीं करते।