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पहाड़ जाने वाले डॉक्टर को मिलेगी ज्यादा सैलेरी

Fri, 29 Aug 2014 04:17 PM IST
अरुणेश पठानिया/अमर उजाला, देहरादून
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चिकित्सकों की स्थानांतरण नीति लागू करने में हो रही देरी से नाराज उत्तराखंड के सीएम हरीश रावत ने गुरुवार को इसे विचलन से लागू कर दिया।
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वहीं निर्देशों के बावजूद नीति लागू करने में हुई देरी पर स्वास्थ्य मंत्री सुरेंद्र सिंह नेगी से आपत्ति जताई। नई नीति में चिकित्सकों को दुर्गम क्षेत्रों में तैनाती देने के लिए वेतन वृद्धि सहित कई आकर्षक प्रावधान हैं। सीएम ने साफ किया है कि स्वास्थ्य और शिक्षा की अनदेखी बर्दास्त नहीं होगी।

पर्वतीय दुर्गम इलाकों में चिकित्सकों को भेजने के लिए आकर्षक स्थानांतरण नीति बनाए जाने के आदेश के बावजूद नीति लागू करने में देरी हो रही थी।

पड़ोसी राज्यों की तबादला नीति के अध्ययन के निर्देश

तबादला नीति के ड्राफ्ट पर मई माह में कार्य शुरू किया गया था। तैयार ड्राफ्ट पर सीएम ने एक माह पूर्व विभागीय मंत्री और उच्च अधिकारियों के साथ पड़ोसी राज्यों की तबादला नीति का भी अध्ययन करने के निर्देश दिए थे।

ड्राफ्ट में कुछ संशोधनों के बाद शासन ने स्वास्थ्य मंत्री सुरेंद्र सिंह नेगी को फाइल अनुमोदन के लिए भेज दी। सूत्रों के मुताबिक मंत्री के स्तर पर अनुमोदन में हो ही देरी की जानकारी से सीएम हरीश रावत ने नाराजगी जताई।

सीएम ने गुरुवार को स्वास्थ्य मंत्री सुरेंद्र सिंह नेगी, मुख्य सचिव सुभाष कुमार और प्रमुख सचिव स्वास्थ्य ओम प्रकाश को स्थानांतरण नीति की फाइल के साथ आवास पर बुलाया।

सीएम ने मंत्री और अधिकारियों से फाइल लटका कर रखने पर नाराजगी जताई। उन्होंने स्वास्थ्य सेवाओं को अपनी पहली प्राथमिकता बताते हुए नीति को कैबिनेट में लाए बिना उसे विचलन से पारित कर दिया।

पहाड़ चढ़ने पर डॉक्टरों को 20 फीसदी अधिक वेतन

चिकित्सकों को पहाड़ों में सेवाएं देने पर मूल वेतन का 20 फीसदी अतिरिक्त मिलेगा। दुर्गम क्षेत्रों मे चिकित्सकों की कमी को देखते हुए सरकार ने यह फैसला लिया है।

इस वृद्धि से दुर्गम में स्थानांतरण होने वाले चिकित्सक को सुगम के मुकाबले न्यूनतम चार से पांच हजार अधिक वेतन मिलेगा। हालांकि इससे पहले केवल 10 फीसदी का प्रावधान किया था जिसे बढ़ा दिया है।

नई तबादला नीति में सुगम में पांच वर्ष तक सेवाओं के बाद तबादला अनिवार्य रहेगा। राज्य में केवल चिकित्सकों के स्वीकृत लगभग 23 सौ पदों पर 11 सौ से कम तैनाती है।

सरकार के लिए सबसे बढ़ी चुनौती दुर्गम में चिकित्सकों को तैनात करने की है, जहां अस्सी फीसदी से अधिक पद रिक्त हैं। तबादला नीति के आभाव में चिकित्सक दुर्गम में जाने को तैयार नहीं है, जबकि केंद्र सरकार लगातार तर्क संगत तैनाती नहीं होने पर नाराजगी जताती रही है।
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हाउस रेंट का अलग प्रावधान

नई नीति में हाउस रेंट की अलग व्यवस्था बनाई गई है। अगर चिकित्सक दुर्गम में तैनात होता है और उसका परिवार सुगम में रह रहा है तो उसको उस शहर के अनुरुप हाउस रेंट मिलेगा जहां परिवार रहता है।

पदोन्नति पर अनिवार्य स्थानांतरण के प्रावधान में हल्का सा बदलाव किया गया है। सुगम में पदोन्नति पाने पर स्थानांतरण दुर्गम में होगा।

जल्द दिखेगा नीति का दम
सीएम के नीति लागू करने के बाद मुख्य सचिव ने उसे वित्तीय प्रावधानों के लिए वित्त विभाग को भेज दिया है, जहां से स्वीकृति के बाद इसे लागू कर दिया जाएगा।

विभाग में अभी 77 सीनियर मेडिकल से संयुक्त निदेशकों को पदोन्नति कर तबादला आदेश जारी होना है। यह सभी वरिष्ठ पदों पर तैनात चिकित्सक हैं, जिनमें से अधिकांश सुगम में तैनात हैं।

मंत्रियों और अफसरों को दिया संकेत
मुख्यमंत्री ने तबादला नीति को विचलन से लागू कर संकेत दिया है कि प्राथमिकताओं वाली फाइलों में होने वाली देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

बुधवार को शिक्षा मंत्री के आदेशों पर हुए तबादलों और अटैचमेंट निरस्त करने के बाद आज तबादला नीति लागू कर सीएम ने साफ कर दिया है शिक्षा और स्वास्थ्य उनकी प्राथमिकता में है। इन दोनों विभागों में तबादलों को लेकर सर्वाधिक खेल चलता है।

मुख्यमंत्री ने स्वास्थ्य विभाग की चिकित्सक स्थानांतरण नीति को विचलन से लागू कर दिया है। उनके आदेश के बाद नीति प्रभावी हो गई है।
- सुभाष कुमार, मुख्य सचिव
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