उत्तराखंड में शिक्षकों की संशोधित तबादला नियमावली में सैनिकों की पत्नियों और स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों की पुत्रियों को स्थानांतरण से छूट दी गई है। ये अब अनुरोध के आधार पर सुगम में तबादला ले सकेंगी। लेकिन, नियमावली में प्रदेश के अर्द्धसैनिकों की शिक्षिका पत्नियों की कोई सुध नहीं ली गई है।
प्रदेश में हजारों की संख्या में अर्द्धसैनिक हैं, जो असम राइफल्स, सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ), भारत तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) जैसे बलों से जुड़े हुए हैं।
सरकारी स्तर पर उन्हें या उनके परिजनों को सैनिकों के मुकाबले कम सुविधाएं मिलती हैं। अब तबादला नियमावली में अर्द्धसैनिकों की शिक्षिका पत्नियों के लिए प्रावधान न होने पर भी सवाल उठे हैं।
पूर्व सैनिक अर्द्धसैनिक संयुक्त संगठन के प्रदेश अध्यक्ष एसएस पांगती (रिटायर्ड आईएएस) का कहना है कि देश की सीमा पर जिन परिस्थितियों से सैनिकों को गुजरना पड़ता है, ठीक उन्हीं हालात से अर्द्धसैनिक भी जूझते हैं। ऐसे में उनकी अनदेखी करना गलत है।
महासचिव पीसी थपलियाल कहते हैं कि कारगिल युद्ध के दौरान शहीद हुए अर्द्धसैनिकों के परिजनों से भी दोयम व्यवहार किया गया। उन्होंने मांग की कि सरकारी योजनाओं में अर्द्धसैनिकों को सैनिकों के समान सुविधाएं व लाभ मिलने चाहिए।
यह पहली सरकार है जिसने स्वतंत्रता संग्राम सेनानी की पुत्री और सैनिक की पत्नी शिक्षिकाओं को तबादलों में छूट दी है। अर्द्धसैनिकों के मामले पर भी विचार करेंगे।
- मंत्री प्रसाद नैथानी, शिक्षा मंत्री